बाबूलाल का राज्यपाल को पत्र ,हेमंत को उत्पाद नीति पर सलाह देने का आग्रह !

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवम नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने महामहिम राज्यपाल को पत्र लिखकर हेमंत सरकार को उत्पाद नीति के  तहत सलाह देने का किया आग्रह
कहा….
राज्य में जनसंख्या के अनुपात में आदिवासी,दलित,दिव्यांग,महिला को श्रेणी को शराब दुकानों का करे आवंटन
अपने कैबिनेट के फैसले जिसमें निजी क्षेत्रों में राज्य के निवासियों को 75% नियोजन का निर्णय है की नीति को शराब दुकानों के आवंटन में भी लागू करे हेमंत सरकार
महामहिम राज्यपाल महोदय,
झारखंड।
विषय: राज्य में अधिसूचित नई उत्पाद (मदिरा की खुदरा बिक्री हेतु दुकानों की बंदोबस्ती एवं संचालन)
नीति के संदर्भ में सुझाव हेतु।
महाशय,
मैं आपका ध्यान पिछले 15 मई, 2025 को झारखंड सरकार द्वारा मंत्रिमंडल बैठक में लिए गए निर्णय राज्य में उत्पाद (मदिरा की खुदरा बिक्री हेतु दुकानों की बंदोबस्ती एवं संचालन) नीति की विसंगतियों की ओर आकृष्ट कराना चाहूंगा।
आपको निवेदनपूर्वक सूचित करना चाहूंगा कि इसके पूर्व में भी वर्तमान मुख्यमंत्री के नेतृत्व में दो बार उत्पाद नीति लागू की जा चुकी है। किंतु दुर्भाग्यवश उन नीतियों का लाभ न तो राजस्व हित में रहा और न ही राज्य के छोटे-छोटे व्यवसायियों और बेरोजगार युवकों के पक्ष में रहा। इसके विपरित वो नीतियाँ शोषण एवं राजस्व के क्षति का कारण बनी। दुकानों में निर्धारित मूल्य ;डत्च्द्ध से अधिक दरों पर शराब बेचने के कारण आम जनता से अवैध वसूली की गई और इसके परिणामस्वरूप प्राप्त होने वाला राजस्व शराब माफियाओं और दलालों के जेब में चला गया।
सरकार अभी जो नई उत्पाद नीति लागू करने जा रही है इसमें भी कई आशंकाएं हो रही है कि राज्य के राजस्व में वृद्धि एवं छोटे-छोटे व्यवसायियों को समानुपातिक अवसर मिलेगा, इसकी उम्मीद कम है। नई उत्पाद नीति में एक व्यक्ति या प्रतिष्ठान को जिला स्तर पर तीन यूनिट यानि 9 दुकानें एवं पूरे राज्य में अधिकतम 36 दुकानें मिलने का प्रावधान रखा गया है। ऐसे में शराब के बड़े-बड़े कारोबारी पूरे राज्य में दुकानों के आवंटन में अपनी भागीदारी करेंगे परिणामस्वरूप      अधितम शराब दुकानें उन्हीं के हाथों में चले जाने की संभावना ज्यादा है और वे लोग मनमानी तरीके से शराब का कारोबार कर सकेंगे।
आप अवगत हैं कि सामाजिक संरचना में हजारों दलित, आदिवासी एवं गरीब महिलायें हैं जो सड़क किनारे हड़िया, दारु बेचकर अपना भरण-पोषण करती हैं।
अतएव राज्य के राजस्व हित एवं समाज के वंचित आदिवासी, दलित एवं गरीब समुदाय के हित में सरकार द्वारा    अधिसूचित नई उत्पाद नीति के संदर्भ में मेरा सुझाव/मांग यह है कि:-
1. जिस प्रकार केन्द्र सरकार पेट्रोल पंप और गैस एजेंसी के लाइसेंस निर्गत करने में दलितों, आदिवासियों, महिलाओं, दिव्यांगों और सेना से सेवानिवृत जवानों को प्राथमिकता देती है, उसी प्रकार राज्य सरकार भी गरीब आदिवासी महिलाओं को जनसंख्या के आधार पर एवं सेना से सेवानिवृत जवानों के लिए देशी एवं विदेशी शराब दुकानों की बंदोबस्ती में आरक्षण दे।
2. नई उत्पाद नीति में एक व्यक्ति-एक दुकान को मानक मानकर एक व्यक्ति या प्रतिष्ठान को पूरे राज्य में एक ही शराब दुकान को संचालित करने का प्रावधान हो ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को व्यवसाय करने का अवसर मिल सके एवं भ्रष्टाचार नहीं हो सके।
3. आग्रह है कि जिस प्रकार राज्य सरकार ने निजी क्षेत्रों में राज्य के लोगों केलिए 75% आरक्षण का निर्णय कैबिनेट में लिया है उसे शराब दुकानों के आवंटन में भी लागू करे।
मेरा आपसे आग्रह है कि उपरोक्त वर्णित सुझावों को नई उत्पाद नीति में समावेश कराने हेतु मा. मुख्यमंत्री जी को समुचित निर्देश देने की कृपा करेंगे ताकि राज्य की नई उत्पाद नीति राज्य हित में कारगर, पारदर्शी एवं समावेशी हो तथा राजस्व हित में भी लाभकारी हो।
सधन्यवाद,
आपका
(बाबूलाल मरांडी)