रांची। हे सरकार, कब सुनोगे विनती हमार, स्कूल फीस माफी पर जरा करो विचार
- By rakesh --
- 26 May 2020 --
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लॉकडाउन स्कूल फीस माफी को लेकर पेरेंट्स एसोसिएशन बैठा धरने पर
इसके पहले कोर्ट में जाने के लिए दे चुका है अल्टीमेटम
स्कूलों की दोहन नीति पर तत्काल रोक लगाए राज्य सरकार- राय
रांची। झारखंड में लॉकडाउन के दौरान बंद सभी स्कूल फीस लेने की विभिन्न हथकंडे अपना रहे हैं। इस संदर्भ में फीस करने के लिए बच्चों के पैरेंट्स को मैसेज भेजकर सूचनाएं भी दी जा रही हैं। ऑल स्कूल पैरेंट्स एसोसिएशन, झारखण्ड, अभिभावकों के हित में लगातार अपना विरोध दर्ज करा कर सरकार से निजी स्कूलों से फीस माफ कराने की अपील कर रहा है।
इसी कड़ी में एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय राय सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए मोरहाबादी मैदान स्थित गांधी स्टैच्यू के पास अभिभावकों के साथ हाथों में ‘No School, No Fees’ लिखे तख्तियां लेकर धरने पर बैठे।
अजय राय ने हेमंत सोरेन को दिलाई याद
अजय राय ने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री बनते समय दिल्ली सरकार की शिक्षा प्रणाली को झारखंड में लागू करने की बात कही थी। शायद मुख्यमंत्री उक्त बातें भूल गए हैं। अब दिल्ली सरकार ने कोरोना लॉकडाउन अवधि की फीस माफी पर सभी स्कूलों को हिदायत देते हुए 18 अप्रैल को ही आदेश निकाल कर सभी निजी स्कूलों को ट्यूशन फीस के अलावा किसी भी तरह की फीस नहीं लेने का नोटिस जारी कर दिया, जिसका पालन वहां के स्कूल कर रहे हैं।
क्या कहते हैं अभिभावक ?
अभिभावकों का कहना है कि लॉकडाउन के कारण वो पूरी तरह बेरोजगार हैं। इस मुश्किल की घड़ी में न उनका कोई रोजगार है और न ही कोई सैलरी। ऐसे में वो स्कूल फीस कहां से जमा करेंगे। अभी तो उनका घर परिवार चला पाना ही मुश्किल हो गया है। उनकी ऐसी स्थिति के बारे में जानकर सरकार को थोड़ा ध्यान जरुर देना चाहिए। ये विनती कर रहे हैं अभिभावक।
दिल्ली के तर्ज पर हो झारखंड सरकार का निर्णय
राय ने कहा कि झारखंड में उसी तर्ज पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह होगा कि वह एक आदेश निकलवाएं जिसमें सिर्फ और सिर्फ ट्यूशन फीस स्कूल ले। उसके अलावा स्कूल किसी तरह की कोई फीस न ले। चूंकि झारखंड के सभी जिलों में स्कूल की ओर से नोटिस के माध्यम से ट्यूशन फीस के साथ-साथ बस फीस, ट्यूशन फीस, एनुअल फीस, बिल्डिंग मेंटेनेंस, स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर फीस और न जाने कितने तरह की फीस शामिल हैं, जमा करने को कहां जा रहा है।
एक तरफ जहां अभिभावक मानसिक तनाव के दौर से गुजर रहे हैं, वहीं स्कूल 10वीं में प्रोविजनल नामांकन के नाम पर लगभग 50 से 60 हजार रुपये चार्ज कर रहे हैं। नामांकन तभी कन्फर्म होना है जब फाइनल रिजल्ट निकलेगा। ऐसे में अभिभावकों के सामने घर का गहना, जमीन, मकान बेचने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा।
दोहन की नीति बंद हो- राय
अजय राय ने कहा कि स्कूलों की इस तरह के दोहन नीति पर राज्य सरकार तत्काल रोक लगाए। इस मामले पर एसोसिएशन ने फिर से कहा है कि 31 मई तक अगर सरकार का रवैया नकारात्मक रहा तो ऑल स्कूल पैरेंट्स एसोसिएशन इस मामले को लेकर कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करेगा। इस दौरान अजय राय के अलावा संजीव दत्ता, विद्याकर कुमार, कुमार रामदीन, आलोक झा, वीरबहादुर सिंह, विस्वजीत कुमार आदि अभिभावक शामिल थे।