साहेबगंज/ बहरागोड़ाः शहीदों का पार्थिव शरीर पहुंचा पैतृक आवस,जानिए वहां का हाल
- By admin --
- 19 Jun 2020 --
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साहेबगंज के शहीद कुंदन ओझा और बहरागोड़ा के शहीद गणेश हांसदा का पार्थिव शरीर उनके पैतृक आवास पर शुक्रवार सुबह पहुंचा। कुंदन ओझा के पैतृक गांव डिहारी और गणेश हांसदा के पैतृक गांव कोसाफालिया में पार्थिव शरीर के पहुंचते ही पूरा गांव भारत माता की जय और शहीद कुंदन ओझा, शहीद गणेश हांसदा अमर रहे के नारों गूंज उठा। साथ ही लोगों ने हिंदुस्तान जिंदाबाद और चीन मुर्दाबाद के नारे भी लगाए।
साहेबगंज के डिहारी गांव…
भारत चीन बॉर्डर पर गलवान घाटी में भारत चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प में शहीद हुए साहेबगंज के लाल कुंदन कुमार ओझा का पार्थिव शरीर सुबह साढ़े आठ बजे उनके पैतृक गांव पहुंचा। पार्थिव शरीर बिहार के दानापुर से सड़क मार्ग के जरिए यहां लाया गया। उधर, पार्थिव शरीर के पहुंचने के पहले ही सुबह से यहां लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी।
डिहारी गांव में पार्थिव शरीर के पहुंचने के बाद यहां श्रद्धांजलि का दौर शुरू हो चुका है। उपायुक्त वरुण रंजन भी मौके पर मौजूद हैं। बताया जा रहा है कि दोपहर एक बजे तक गंगा घाट के किनारे मुनिलाल शमशान घाट पर शहीद का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
डिहारी गांव में पार्थिव शरीर लाए जाने से पहले दानापुर में बिहार रेजीमेंट की छावनी में कुंदन ओझा को श्रद्धांजलि दी गई। जानकारी के मुताबिक, रामगढ़ सैनिक छावनी से एवं दानापुर सैनिक छावनी से आर्मी के जवान भी उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देने के लिए यहां पहुंचे हैं। अंतिम संस्कार के लिए मुनीलाल श्मशान घाट लाया जाएगा, यहां भी उन्हें सैनिक सम्मान दिया जाएगा।
बहरागोड़ा के कोसाफालिया गांव…
भारत-चीन सीमा पर लद्दाख की गलवान घाटी में शहीद हुए बहरागोड़ा प्रखंड के कोसाफालिया निवासी गणेश हांसदा (21) का पार्थिव शरीर रांची के नामकुम से शुक्रवार सुबह हेलिकॉप्टर के जरिए उनके पैतृक गांव लाया गया। शहीद के पार्थिव शरीर के आने की सूचना के बाद शुक्रवार सुबह से ही यहां लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। सभी लोग भारत माता की जय, गणेश हांसदा अमर रहे का नारा लगाते रहे।
शहीद गणेश हांसदा का पार्थिव शरीर गुरुवार देर शाम रांची पहुंचा था जहां राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा समेत अन्य लोगों ने उन्हें बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद शाम हो जाने के चलते पार्थिव शरीर को नामकुम स्थित सेना के कैंप में रख लिया गया। शहीद के पैतृक आवास पर उन्हें श्रद्धांजलि और सैनिक सम्मान दिया जाएगा। इसके बाद घर के पास ही उनके निजी जमीन पर ही अंतिम संस्कार किया जाएगा।