रांची: बढ़ती कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या का जिम्मेवार कौन ?

रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन लॉकडाउन में बाहर राज्यों में फंसे मजदूरों को लाकर उन्हें अपने घर भेज रहे हैं। ये बहुत ही काबिले तारीफ है कि राज्य के बाहर कई दिनों से फंसे मजदूरों के पास खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं थी।

लेकिन दूसरी तरफ मजदूरों के साथ कोरोना का भी संक्रमण बढ़ रहा है। इसके लिए कौन जिम्मेवार है ? यह एक बड़ा सवाल है। इस बिमारी से अबतक 5 लोगों की जान गयी है।

क्या कहते हैं आंकड़े ?

अगर पिछले आंक़ड़ों की बात करें, तो मजदूरों के राज्य में प्रवेश से पहले कोरोना प़ॉजिटिव मरीजों की संख्या 115 थी, वहीं एक्टिव मरीजों की संख्या 90 थी। 2 मई, 2020 से लगातार राज्य से बाहर फंसे लोगों का आना जारी है। 29 मई, 2020 को ये संख्या 115 से बढ़कर 524 हो गई और 300 कोरोना एक्टिव मरीज थे।

साफ जाहिर है कि लोगों के झारखंड राज्य में आने के बाद मरीजों की संख्या में तकरीबन ढाई से तीन गुणा वृद्धि हुई है। राज्य की रिकवरी रेट 83.6 फीसदी है तो देश का लगभग 42 फीसदी। कई मरीजों के रिपोर्ट निगेटिव भी आए हैं और वो ठीक होकर अपने घर भी जा चुके हैं।

कहां हो रही लापरवाही ?

अपने घर लौटे मरीजों ने बताया कि जांच के नाम पर सिर्फ थर्मोमीटर गन से शरीर का तापमान चेक किया जा रहा है। फिर सीधे घर या फिर तापमान बढ़े होने पर क्वारेंटीन भेज दिया जा रहा है। लेकिन क्वारेंटीन में समुचित व्यवस्था नहीं होने की वजह से लोगों के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

नाम न बताने की शर्त पर कुछ मजदूरों का ये भी कहना है कि क्वारेंटीन में न ऱखे जाने के भय से बुखार की दवा पारासीटामोल खाकर ट्रेन में सफर के लिए निकले हैं। ऐसे में क्या सिर्फ थर्मोमीटर गन के भरोसे कोरोना से जंग जीतना संभव है ?

कितना कारगर है थर्मोमीटर गन ?

आपके शरीर का तापमान यह नहीं बताता है कि आप कोरोना वायरस से संक्रमित हैं। इंसान को बुखार तब आता है जब शरीर को यह अहसास होता है कि कोई घुसपैठिया आया है। इसके बाद इम्‍यून सिस्‍टम कुछ केमिकल छोड़ता है और इससे गर्मी बढ़ती है। हालांकि अगर किसी ने दवा खायी है, तो उसके शरीर का तापमान कम हो जाएगा। ऐसे मरीजों की पहचान थर्मोमीटर गन से नहीं हो पाएगी।

ऐसे में इस उपकरण की क्षमता को लेकर संदेह उठने शुरू हो गए हैं। शक्तिशाली सेंसर तकनीक के बावजूद चिकित्सा अधिकारियों और विशेषज्ञों का कहना है कि सेंसर युक्त यह थर्मोमीटर अप्रभावी रक्षा तंत्र साबित हुआ है।

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इन कमियों के बावजूद भी इस थर्मोमीटर गन का इस्‍तेमाल पूरी दुनिया में किया जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि बेहद कम समय में इतनी बड़ी तादाद में लोगों की जांच का और कोई आसान तरीका है भी नहीं। हर किसी की थर्मामीटर या शारीरिक जांच संभव नहीं है। इसीलिए कई बार सही आंकड़े नहीं देने के बाद भी थर्मोमीटर गन का ही इस्‍तेमाल किया जा रहा है।

क्या कहते हैं स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव ?

स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव डॉ नितिन मदन कुलकर्णी ने जानकारी देते हुए बताया कि मृत्यु दर के मामले में झारखंड राष्ट्रीय औसत से काफी बेहतर है। झारखंड की मृत्यु दर 1.05 फीसदी है तो राष्ट्रीय 3.64 फीसदी है। राज्य का ग्रोथ रेट 6.4 फीसदी है तो राष्ट्रीय 4.9 फीसदी है। राज्य में अबतक  कोरोना संक्रमण के लगभग 58 हज़ार टेस्ट हो चुके हैं।