दुर्लभ खनिजों से संबंधित चीन के नए नियमों ने डाला परेशानी में !

 चीन के नए नियम ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग के लिए समस्या, कंपनियों की लागत 25% बढ़ने, उत्पादन 30% तक घटने का अंदेशा

दुर्लभ खनिजों से संबंधित चीन के नए नियमों ने भारत समेत दुनिया के प्रमुख देशों को परेशानी में डाल दिया है। इसका मुख्य कारण इन खनिजों से बने चुंबक (rare earth magnets) हैं। ये चुंबक आकार में छोटे होने पर भी अधिक शक्तिशाली होते हैं। अधिक क्षमता वाले मोटर और छोटे कंपोनेंट बनाने में इनका प्रयोग बढ़ रहा है।

इलेक्ट्रिक वाहन, विंड टरबाइन, स्मार्टफोन, मेडिकल डिवाइस और रक्षा उपकरणों में इनके बढ़ते इस्तेमाल के कारण सभी प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग देश अधिक से अधिक दुर्लभ खनिज मैग्नेट चाहते हैं। हीट रेजिस्टेंस गुण के कारण इस मैग्नेट का इस्तेमाल वहां और महत्वपूर्ण हो जाता है जहां परफॉर्मेंस और प्रिसीजन अहम होता है। इसलिए इनकी सप्लाई चेन पर नियंत्रण को राष्ट्रीय सुरक्षा के रूप में भी देखा जाने लगा है।

90% दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति पर चीन का नियंत्रण

वर्तमान में इस चुंबक को बनाने में इस्तेमाल होने वाले 90% दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति पर चीन का नियंत्रण है। दुनिया के 80% दुर्लभ खनिज चुंबकों का उत्पादन चीन ही करता है। हर साल वह दो लाख टन से ज्यादा चुंबकों का उत्पादन करता है। इसके विपरीत उत्तरी अमेरिका और यूरोप मिलकर 2,000 टन से भी कम चुंबक बनाते हैं। जापान और वियतनाम का योगदान लगभग 25,000 टन का है।

लगभग छह महीने पहले तक चीन से इन चुंबकों का निर्यात निर्बाध रूप से हो रहा था। लेकिन अप्रैल में जब अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन पर टैरिफ बढ़ाने की घोषणा की तो चीन ने सात रेअर अर्थ तत्वों (REE) के निर्यात पर सीमित प्रतिबंध लगा दिया। तब कच्चे माल के रूप में इनका निर्यात प्रभावित हुआ था।