रांची: कोरोना काल में भगवान जगन्नाथ के कब और कैसे होंगे दर्शन, पढ़िये…

पूर्णिमा के दिन महास्नान के बाद भगवान जगन्नाथ अस्वस्थ हो गए हैं। अब मंदिर के पट बंद हैं। भगवान जगन्नाथ को जड़ी-बूटी से बनी दवाइयां दी जा रही हैं, ताकि भगवान जल्द से जल्द स्वस्थ हो सकें। सुबह के वक्त भगवान की आरती केवल पुजारी ही कर रहे हैं। श्रद्धालु इस बार जड़ी बूटी लेकर मंदिर नहीं आ सकेंगे, क्योंकि मंदिर बन्द है।

22 जून को भगवान जगन्नाथ के नव-यौवन रूप का दर्शन सुबह 6.30 से सात बजे के बीच होगा। ठीक उसके दूसरे दिन छेर-पंहरा की रस्म के साथ भगवान अपने सभी भक्तों को दर्शन देने के लिए रथ पर सवार होंगे। मगर इस वर्ष रथ यात्रा नहीं निकलेगी।

अस्वस्थ भगवान जगन्नाथ को अभी 10 से अधिक जड़ी – बूटियों से बने काढ़े का सेवन कराया जा रहा है। इसमें अजवाइन, लौंग, तुलसी पत्ता, मिश्री, मधु, तेजपत्ता, सौफ, काली मिर्च, अदरख व सोंठ मिलाकर उसका काढा बनाकर उन्हें नित्य भोग लगाया जा रहा है।अस्वस्थ रहने से भगवान को अन्न का भोग नहीं लग रहा है। उन्हें सूखे मेवे और फल का भोग चढ़ाया जा रहा है।

भगवान के अस्वस्थ होने की वजह से प्रतिदिन पांच बार होने वाली आरती अभी मात्र एक बार ही हो रही है। वहीं पहले जहां पांचों आरती के वक्त घंटी बजायी जाती थी , उसे अब बंद कर दिया गया है। पूरी शांति के साथ आरती की जा रही है।

मुख्य पुजारी हिमांशु शेखर दास ने कहा कि पहले एक से अधिक पुजारी भगवान के पास जाते थे, लेकिन अस्वस्थ होने के बाद से अब सिर्फ एक ही पुजारी भगवान के पास अंदर जा रहे हैं। फिलहाल भगवान एक बार ही वस्त्र बदल रहे हैं। जबकि सामान्य दिनों में वे दो बार वस्त्र बदलते थे।