झारखंड के राजस्व संग्रह पर वित्त मंत्री का बड़ा दावा, लक्ष्य से 6% पीछे चल रहा राज्य
- By rakesh --
- 11 Sep 2026 --
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रांची: झारखंड सरकार के राजस्व संग्रह को लेकर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य ने फिलहाल निर्धारित कुल राजस्व लक्ष्य का करीब 36 प्रतिशत संग्रह किया है और मौजूदा स्थिति में सरकार लगभग 6 प्रतिशत पीछे चल रही है। हालांकि, वित्त मंत्री ने भरोसा जताया कि नवंबर में होने वाली अगली समीक्षा तक राज्य निर्धारित लक्ष्य से आगे निकलने में सफल होगा।
राजस्व संग्रह को लेकर हुई चर्चा में उन्होंने अधिकारियों से व्यक्तिगत स्तर पर इच्छाशक्ति और प्रतिबद्धता के साथ काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि राजस्व कैलेंडर में निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने के लिए अधिकारियों में काम के प्रति गंभीरता और जुनून होना जरूरी है।
नवंबर की समीक्षा तक लक्ष्य पार करने का भरोसा
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि वर्तमान आंकड़ों के आधार पर राज्य राजस्व लक्ष्य से पीछे जरूर है, लेकिन सरकार इसे लेकर चिंतित नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नवंबर में होने वाली अगली समीक्षा तक राजस्व संग्रह की स्थिति में सुधार होगा और राज्य लक्ष्य से अधिक संग्रह करने की स्थिति में पहुंच जाएगा।
उन्होंने अधिकारियों को राजस्व संग्रह बढ़ाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करने को कहा। मंत्री के अनुसार, निर्धारित राजस्व कैलेंडर के लक्ष्य को हर स्तर पर गंभीरता से लेना होगा।
केंद्र की नीतियों से 22 हजार करोड़ के नुकसान का दावा
राजस्व संग्रह पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री ने केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि केंद्र की नीतियों के कारण झारखंड को हर साल करीब 22 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
राधाकृष्ण किशोर के अनुसार, इसमें करीब 4 हजार करोड़ रुपये जी राम जी योजना, लगभग 14 हजार करोड़ रुपये MMDR Amendment Bill और करीब 4 हजार करोड़ रुपये GST Rationalisation से जुड़े नुकसान शामिल हैं।
वित्त मंत्री ने इन आंकड़ों के आधार पर कहा कि अलग-अलग प्रावधानों और नीतिगत बदलावों के कारण राज्य के राजस्व पर बड़ा असर पड़ रहा है। ये आंकड़े और आरोप वित्त मंत्री द्वारा रखे गए दावों पर आधारित हैं।
केंद्र के सहयोग पर वित्त मंत्री ने उठाए सवाल
राधाकृष्ण किशोर ने केंद्र सरकार से मिलने वाले आर्थिक सहयोग को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि या तो केंद्र सरकार की अपनी वित्तीय स्थिति खराब है या फिर गैर-भाजपा शासित राज्य होने के कारण झारखंड को अपेक्षित आर्थिक सहयोग नहीं मिल रहा है।
उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया। वित्त मंत्री ने कहा कि यदि झारखंड आर्थिक रूप से मजबूत स्थिति में होता तो राज्य को केंद्र से आर्थिक सहायता मांगने की आवश्यकता क्यों पड़ती।
हालांकि, उन्होंने राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर भरोसा जताते हुए कहा कि झारखंड कमजोर राज्य नहीं है। सरकार अपनी योजनाओं और उनसे जुड़े आर्थिक दायित्वों को पूरा करने में सक्षम है।
फर्जी GST और अवैध कोयला परिवहन पर सख्ती
राजस्व संग्रह बढ़ाने के लिए राज्य का वाणिज्य-कर विभाग अब टैक्स चोरी के खिलाफ कार्रवाई तेज करने की तैयारी में है। वित्त मंत्री ने अधिकारियों को फर्जी GST पंजीकरण, GST चोरी और अवैध कोयला परिवहन पर सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि टैक्स चोरी को हर हाल में रोकना होगा। सरकार की रणनीति में राजस्व के मौजूदा स्रोतों को मजबूत करने के साथ कर चोरी पर प्रभावी अंकुश लगाना भी शामिल है।
60 हजार करोड़ के लक्ष्य से एक लाख करोड़ तक पहुंचने की योजना
वित्त मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार का स्टेट ऑन टैक्स रेवेन्यू और नॉन-टैक्स रेवेन्यू मिलाकर करीब 60 हजार करोड़ रुपये का लक्ष्य है। इसके साथ ही सरकार की दीर्घकालिक महत्वाकांक्षा राजस्व संग्रह को बढ़ाकर एक लाख करोड़ रुपये तक ले जाने की है।
ऐसे में सरकार के सामने राजस्व संग्रह बढ़ाने के साथ GST से जुड़े संग्रह में गिरावट और केंद्र से आर्थिक सहयोग के मुद्दे को लेकर चुनौती बनी हुई है। नवंबर की समीक्षा बैठक इस लिहाज से अहम होगी, क्योंकि उस समय तक राजस्व संग्रह की वास्तविक स्थिति और निर्धारित लक्ष्य की दिशा में हुई प्रगति की तस्वीर अधिक स्पष्ट होगी।
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