बंगाल में नहीं थम रही हिंसा, पुलिस से भिड़े आईएसएफ समर्थक

बंगाल में नहीं थम रही हिंसा, पुलिस से भिड़े आईएसएफ समर्थक, बवाल के बाद हाई अलर्ट

बंगाल में वक्फ कानून को लेकर जारी हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। ताजा घटना में इंडियन सेक्युलर फ्रंट के समर्थक पुलिस से भिड़ गए। इस दौरान जमकर बवाल हुआ। हिंसा में कई लोगों के घायल होने की खबर है और कई पुलिस वाहनों को आग लगा दी गई। यह हिंसा बंगाल के दक्षिण 24 परगना में हुई। यह झड़प तब हुई, जब पुलिस ने आईएसएफ समर्थकों को पार्टी के नेता और भांगर विधायक नौशाद सिद्दीकी की रैली में जाने से रोकने की कोशिश की। नौशाद सिद्दीकी की रैली कोलकाता के रामलीला मैदान में हुई। पुलिस का कहना है कि इस रैली के लिए पुलिस की अनुमति नहीं थी।

पुलिस ने बताया आईएसएफ समर्थकों को दक्षिण 24 परगना में बसंती राजमार्ग पर भोजेरहाट के पास रोका गया। यहां पर मीनाखान और संदेशखाली से भी बड़ी संख्या में आईएसएफ समर्थक इकट्ठा हुए थे। पुलिस द्वारा रोके जाने पर भीड़ ने बैरिकेट तोड़ने की कोशिश की, जिससे तनाव बढ़ गया। इसके बाद हिंसा शुरू हो गई। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि प्रदर्शकारियों ने कुछ पुलिस वाहनों में आग लगा दी। इस दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।

कौन है जिम्मेदार

बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव है और साल 2011 की जनगणना के मुताबिक़, मुर्शिदाबाद में 66 फ़ीसदी से अधिक मुस्लिम आबादी है और हाल के लगभग सभी चुनावों में तृणमूल कांग्रेस ने लगभग हर सीट जीती है।

मुर्शिदाबाद के सभी तीन सांसद राज्य की सत्ताधारी पार्टी के हैं, जबकि राज्य विधानसभा में मुर्शिदाबाद के 22 में से 20 सदस्य तृणमूल कांग्रेस के हैं।

ये हिंसक घटनाएं उत्तरी मुर्शिदाबाद इलाक़े में हुई हैं. इस इलाक़े के सभी विधायक तृणमूल कांग्रेस के हैं. इसके अलावा आठ में से सात नगरपालिकाओं और सभी 26 पंचायत समितियों में तृणमूल कांग्रेस का नियंत्रण है।

टीएमसी के इतने भारी बहुमत और नियंत्रण और बीजेपी की ग़ैर-मौजूदगी के बावजूद स्थिति कैसे नियंत्रण से बाहर हो गई? यह एक ऐसा सवाल है जिसे ममता बनर्जी से पूछा जाना चाहिए।