Jharkhand High Court: रजरप्पा प्रोजेक्ट की 18.19 एकड़ जमीन के मुआवजा विवाद में CCL को झटका
- By rakesh --
- 24 Sep 2026 --
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रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने रामगढ़ जिले के रजरप्पा प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहित 18.19 एकड़ जमीन के मुआवजा विवाद में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है. न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने अतिरिक्त न्यायिक आयुक्त-सह-ट्रिब्यूनल, रांची के वर्ष 2018 के फैसले को रद्द कर दिया है.
हाईकोर्ट ने मामले को दोबारा सुनवाई के लिए ट्रिब्यूनल में भेज दिया. अदालत ने अपीलकर्ताओं की ओर से पेश किये गये अतिरिक्त दस्तावेजों को भी रिकॉर्ड पर लेने का निर्देश दिया. कोर्ट ने माना कि ये दस्तावेज मामले के निष्पक्ष निपटारे के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं.
1962 में रजरप्पा परियोजना के लिए हुआ था अधिग्रहण
यह मामला रामगढ़ जिले के मौजा सेवई स्थित खाता संख्या 83 की 18.19 एकड़ जमीन से संबंधित है. अपीलकर्ताओं के अनुसार, प्लॉट संख्या 656, 1134 और 1216 वाली यह रैयती जमीन उनके परिवार की थी.
दावे के मुताबिक, केंद्र सरकार ने 29 दिसंबर 1962 को कोल बेयरिंग एरिया (अधिग्रहण एवं विकास) अधिनियम, 1957 के तहत रजरप्पा परियोजना के लिए जमीन का अधिग्रहण किया था.
बाद में राष्ट्रीय कोयला विकास निगम यानी NCDC का विलय सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड यानी CCL में हो गया. इसके बाद अधिग्रहित जमीन के मुआवजे से संबंधित जिम्मेदारी CCL पर आ गयी.
परिवार का दावा: नौकरी मिली, लेकिन मुआवजा नहीं
अपीलकर्ताओं ने अदालत में बताया कि मूल दावेदार टिकेंद्र चौधरी के निधन के बाद उनके कानूनी उत्तराधिकारी मामले को आगे बढ़ा रहे हैं.
परिवार का कहना है कि अधिग्रहित जमीन के बदले मूल दावेदार को CCL में नौकरी दी गयी थी, लेकिन जमीन का मुआवजा अब तक नहीं मिला है.
अपीलकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि जिला भूमि अधिग्रहण पदाधिकारी ने वर्ष 1989 में संबंधित जमीन को रैयती भूमि के रूप में मान्यता दी थी. उनके अनुसार, परिवार के पास हुकुमनामा, परचा, जमींदारी रसीद और अन्य सरकारी दस्तावेज मौजूद हैं.
2018 में ट्रिब्यूनल ने खारिज कर दिया था दावा
इस मामले में अतिरिक्त न्यायिक आयुक्त-सह-ट्रिब्यूनल, रांची ने 29 सितंबर 2018 को दावा खारिज कर दिया था.
ट्रिब्यूनल के फैसले में कहा गया था कि दावेदार आवश्यक फॉर्म-के और संबंधित परचा रिकॉर्ड पर प्रस्तुत नहीं कर सके. इसके बाद परिवार ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की.
अपील की सुनवाई के दौरान परिवार की ओर से अतिरिक्त साक्ष्य के रूप में परचा और दूसरे दस्तावेज पेश किये गये. अपीलकर्ताओं ने बताया कि इसी खाता और प्लॉट से जुड़े अन्य रैयतों को इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर पहले मुआवजा मिल चुका है.
हाईकोर्ट ने अतिरिक्त दस्तावेजों को माना महत्वपूर्ण
हाईकोर्ट ने आदेश 41 नियम 27 सीपीसी के तहत अतिरिक्त दस्तावेजों को स्वीकार किया. अदालत ने कहा कि अपीलीय स्तर पर अतिरिक्त साक्ष्य तभी रिकॉर्ड पर लिये जा सकते हैं, जब वे न्यायपूर्ण निर्णय के लिए आवश्यक हों.
खंडपीठ ने पाया कि इसी खाता और प्लॉट से संबंधित अन्य दावेदारों के मामलों में भी ये दस्तावेज निर्णायक भूमिका निभा चुके हैं.
अदालत ने यह भी गौर किया कि CCL ने सुनवाई के दौरान यह स्वीकार किया है कि संबंधित जमीन का अधिग्रहण हुआ था और मूल दावेदार को नौकरी भी दी गयी थी.
अब ट्रिब्यूनल में होगी मामले की दोबारा सुनवाई
हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल का 2018 का आदेश रद्द करते हुए दावा मामला मूल रिकॉर्ड पर बहाल कर दिया. अदालत ने निर्देश दिया कि ट्रिब्यूनल अतिरिक्त दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करते हुए मामले में नये सिरे से फैसला करे.
मामला काफी पुराना होने के कारण हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को 29 सितंबर 2026 को सुबह 10:30 बजे ट्रिब्यूनल के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया है.
अदालत ने पक्षकारों को अनावश्यक स्थगन लेने से बचने को भी कहा है, ताकि लंबे समय से लंबित मुआवजा विवाद पर जल्द सुनवाई पूरी की जा सके.
अब ट्रिब्यूनल संबंधित दस्तावेजों, जमीन के अधिग्रहण, पूर्व दावों और मुआवजे से जुड़े तथ्यों की समीक्षा कर आगे का निर्णय करेगा.
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