असम के आदिवासी समाज की सुख-दुःख में सदैव खड़ा रहेगा झारखंड : हेमंत
- By rakesh --
- 02 Feb 2026 --
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असम के तिनसुकिया में आयोजित “21वीं आदिवासी महासभा-2026” में सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन।
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★ असम के आदिवासी समाज की सुख- दुःख में झारखंड सदैव खड़ा रहेगा
★ हमारी एकजुटता हमारी पहचान
★ हर वर्ग समुदाय के जनमानस तक सरकार की योजनाओं को पहुंचना लक्ष्य
★ झारखंड की महिलाएं हुई सशक्त
★ हमारे विकास मॉडल की कॉपी कर रहे दूसरे राज्य
★ देश की अर्थव्यवस्था में झारखंड सबसे ज्यादा योगदान देने वाला राज्य
हेमन्त सोरेन, मुख्यमंत्री
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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने असम के तिनसुकिया जिला में ऑल आदिवासी स्टूडेंट एसोसिएशन ऑफ आसाम द्वारा आयोजित “21वीं आदिवासी महासभा-2026” को संबोधित करते हुए कहा कि यहां आप सभी आदिवासी समुदाय के लोग जो लगभग डेढ़ सौ वर्षों से यहां रह रहे हैं उनसे रू-ब-रू होने का आज मुझे मौका मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के वैसे सभी आदिवासी-मूलवासी समुदाय के जनमानस जो असम में रह कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं उनकी तकलीफों, उनपर हो रहे अत्याचारों और व्यथा को सुनने के लिए हम आज यहां आए हैं। हम लोग झारखंड से आए हैं, कहीं न कहीं आप सभी का जुड़ाव भी झारखंड से बहुत पुराना रहा है। झारखंड एक ऐसा प्रदेश है जब देश के लोग आजादी का सपना भी नहीं देखे थे, उस समय आजादी की लड़ाई हमारे पूर्वज अंग्रेजों के साथ लड़ रहे थे। देश की आजादी में धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा, सिदो कान्हू, तिलका मांझी सहित झारखंड के अनगिनत वीर सपूतों का अहम योगदान रहा है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे वीर सपूतों ने पीढ़ियों को बचाने, जल, जंगल, जमीन को बचाने के लिए अपना बलिदान दिया है। आदिवासी समाज के लोगों ने ही अंग्रेजों से सबसे पहले लोहा लेने का काम किया था।आखिर किस कारण से आज देश के विभिन्न हिस्सों में आदिवासी समाज के लोग अपने हक-अधिकार की लड़ाई के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी, मूलवासी, दलित, पिछड़ा वैसे वर्ग है जो समाज के सबसे कमजोर एवं नीचे पायदान में रहने वाले लोग हैं। ऐसी क्या परिस्थिति आ गई जो यहां के आदिवासी-मूलवासी अलग-थलग होकर बिखरने को मजबूर हुए हैं। कई जगहों पर आदिवासी समुदाय के लोग हाशिए पर रहकर अपना जीवन जी रहे हैं। इन विषयों पर गंभीर चिंतन की जरूरत है।मौके पर मुख्यमंत्री ने असम के कद्दावर आदिवासी नेता स्व० प्रदीप नाग एवं प्रसिद्ध गायक स्व० जुबिन गर्ग को श्रद्धांजलि अर्पित की।
राज्य सरकार की योजनाओं को घर-घर पहुंचने का हुआ कार्य
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि देश आजाद हुए 75 साल हो गए हैं। देश में कई नीतियां-कानून बने। देश के संविधान से हमें रक्षा कवच मिला उसके बावजूद आज हम कहां खड़े हैं। आज हमारा समाज कितना संघर्ष कर रहा है यह बहुत बेहतर तरीके से आप सभी लोग जानते हैं। आज सामाजिक, आर्थिक और बौद्धिक रूप से आदिवासी समुदाय कमजोर है और इसी कमजोरी का फायदा बड़े एवं सामंती विचारधारा वाले लोग बहुत चालाकी से उठाते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आदरणीय दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी आज हमारे बीच नहीं हैं, जब उन्होंने अलग राज्य की परिकल्पना की तो कुछ लोग मजाक उड़ाते थे कि आदिवासी लोग अलग राज्य बनाएंगे। आज सच्चाई पूरे देश के सामने हैं। वर्ष 2000 में अलग झारखंड राज्य झारखंड बना। यह बात सही है कि उस समय क्या नारा लगता था, कैसे लेंगे झारखंड, लड़के लेंगे झारखंड। उस समय न मोबाइल, न गाड़ी, न मोटर उसके बावजूद झारखंड के लोग जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए चीटियों की तरह एकजुट हो जाते थे। राज्य अलग हुआ लेकिन इसका फायदा आदिवासी समुदाय को नहीं मिला। हम लोगों को तो राज्य लेना था, हमारे अग्रणी नेताओं ने सोचा कि राज्य अलग होगा तो यहां के आदिवासियों-मूलवासियों का विकास होगा। झारखंड राज्य अलग होने के बाद बौद्धिक रूप से मजबूत लोगों ने 15 वर्ष से ज्यादा समय तक झारखंड को पीछे धकेलने का काम किया, नतीजा यह हुआ कि राशन कार्ड लेकर लोग भात-भात-कहते हुए भूख से मरने को विवश हुए, फिर हमने प्रखंड-प्रखंड, गांव-गांव, टोला-टोला पहुंचकर लोगों को जागरूक करने का काम किया फिर लोगों ने हमें राज्य की बागडोर संभालने का मौका दिया। राज्य का बागडोर संभालते ही हमने 5 साल के भीतर स्थिति को बदलने की कोशिश की और हमें सफलता भी मिली। वैसे गरीब, पीड़ित, शोषित, आदिवासी-मूलवासी समुदाय के लोग जो कभी जिला ऑफिस, प्रखंड कार्यालय नहीं देखे थे, बीडीओ, सीओ, डीसी, एसपी को नहीं जानते थे उनतक हमने राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को पहुंचाने का काम किया है।
आदिवासी अपना हक-अधिकार, अपनी मान्यता के लिए कर रहे संघर्ष
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में रहते हुए हमारे यहां के आदिवासी अपना हक-अधिकार, अपनी मान्यता के लिए संघर्षशील हैं। आज आदिवासियों के हितैषी बनने वाले लोग आदिवासियों को ही हाशिए पर रखने के लिए उतारू हैं। वे जानते हैं कि आदिवासी समाज अगर आर्थिक और बौद्धिक रूप से मजबूत हो गया तो वे अपनी हक-अधिकार, जल-जंगल-जमीन की बात करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा की जरूरत पड़ने पर आसाम में रहने वाले आदिवासियों की मदद करने के लिए पूरा झारखंड का आदिवासी समाज आगे आकर खड़ा होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी समुदाय की एकजुटता ही हमारी पहचान है। पहले दुनिया हमारी एकजुटता का लोहा मानती थी। हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई सभी वर्ग-समुदाय के लोगों की एकजुटता देश को मजबूती प्रदान करती है, लेकिन पिछले कुछ समय से बौद्धिक और आर्थिक रूप से समृद्ध लोगों ने हमारी एकजुटता पर प्रहार करने का काम किया है।
राज्य में महिलाएं हुई सशक्त
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था में झारखंड सबसे ज्यादा योगदान देने वाला राज्य है। हमारी सरकार ने यह तय किया है कि इस राज्य ने बहुत कुछ दिया है अब इस राज्य के लोगों को वापस देने की जरूरत है। हमारे राज्य के संसाधन का सही मूल्य मिले इस पर हम बेहतर कार्यपद्धति से आगे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहली बार विश्व आर्थिक मंच (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम) के वार्षिक सम्मेलन में एक आदिवासी मुख्यमंत्री के नेतृत्व में झारखंड ने अपनी ऐतिहासिक उपस्थिति दर्ज किया है। आज झारखंड ने वैश्विक पटल पर अपनी बातें पहुंचाई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने राज्य की आधी आबादी को आत्मनिर्भरता की राह पर ले जाने का काम कर दिखाया है। प्रत्येक माह राज्य की लगभग 55 लाख महिलाओं को मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत उनके बैंक खाते में 2500 रुपए की राशि भेजी जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब हमारे विकास मॉडल की कॉपी दूसरे राज्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना की राशि पिछले दो वर्षों से निरंतर यहां की महिलाओं को मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने झारखंड के नौजवानों के लिए गए महत्वाकांक्षी स्कीम्स लागू किए हैं। यहां के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए 15 लख रुपए तक का एजुकेशन लोन बिना कोई गारंटी के उपलब्ध कराई जा रही है।
इस अवसर पर मंत्री चमरा लिंडा, सांसद विजय हांसदा, विधायक मो० ताजुद्दीन उर्फ एमटी राजा, ASSAA सेंट्रल कमेटी के अध्यक्ष रेजन होरो, उपाध्यक्ष डेविड तिर्की , अमरजीत केरकेट्टा, अल्बर्ट ओरिया सहित अन्य सदस्यगण, असम के कोने-कोने से बड़ी संख्या में पहुंचे महिला, पुरुष, नौजवान, बच्चे, बच्चियां सहित आदिवासी समुदाय के लोग उपस्थित थे।
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