चतराः गांव में नल तो लगे लेकिन एक बूंद नहीं गिरा पानी

सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकीत कुछ और ही रहती है। चतरा जिले का सिमरिया अनुमंडल विकास के लिए अभीतक तरस रहा है।  यहां के गांवों में न अच्छी सड़क है न पानी की उचित व्यवस्था, हां अधिकारी और जनप्रतिनिधि आश्वासन देने में पीछे नहीं रहते जिससे ग्रामीणों में आक्रोश देखा जा रहा है।

किसी इलाके के विकास के लिए पानी,बिजली, सड़क और स्कूल जरूरी चीजें होती हैं,लेकिन झारखंड के ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में इसकी भारी कमी है। चतरा जिले के सिमरिया अनुमंडल के गांव भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं, चतरा जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर बेलगड्ढा गांव में पानी सप्लाई के लिए 9 साल पहले ही जलमीनार का निर्माण करवाया गया था।

इसे बनाने में 19 लाख रूपये लगे थे, लेकिन आजतक नल से एक बूंद पानी नहीं निकला। इससे ग्रामीणों में आक्रोश है, उनका कहना है कि उन्हें मूलभूत सुविधायें भी नहीं दी जा रही है,बिजली, पानी और अच्छी सड़क के लिए तरस रहे हैं, चुनाव के समय राजनेता और सरकार के नुमाइंदे जरूर आश्वासन का पिटारा खोल देते हैं।इस मामले में प्रखंड विकास पदाधिकारी अमित कुमार मिश्रा ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आ गया है,अब बंद पड़े जलमीनार को शुरू कर दिया जायेगा।

सरकारी अधिकारियों की लापरवाही का एक नमूना बेलगड्ढा का जलमीनार योजना है। कई सालों पहले ये जलमीनार बना लेकिन आजतक ग्रामीणों को एक बूंद पानी भी नसीब नहीं हुआ। जब जलमीनार बन रहा था तो ग्रामीणों में उत्साह था कि अब उन्हें पीने के लिए साफ पानी मिलेगा,लेकिन अधिकारियों की लापरवाही की वजह ग्रामीण अभी भी साफ पानी के लिए तरस रहे हैं।