गुमला शहर से सटे गांव भी विकास से क्यों हैं कोसों दूर?

गुमला शहर से सटे गांव भी विकास से क्यों हैं कोसों दूर?

  • गुमला के गांवों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव
  • पानी, सड़क और शिक्षा के अभाव से जूझ रहे ग्रामीण
  • पढ़ाई नहीं होने से युवाओं का भविष्य अधर में

झारखण्ड में सरकार की योजनाओं की बुरी गत को देखना हो तो गुमला शहर से मात्र दो किलोमीटर दूर करौंदी पंचायत आ जाइए. सरकारी उदासीनता की वजह से इलाके में विकास योजना नाममात्र का पहुंचा, यहां पानी, सड़क और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है.

प्रकृति की गोद में बसा है करौंदी पंचायत का हंसलता और अंबाटोली गांव. गुमला शहर से मात्र कुछ दूरी पर स्थित इस गांव में विकास के कार्य न के बराबर हुए हैं. ग्रामीणों की नाराजगी सरकारी पदाधिकारी और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता को लेकर है. सरकार योजनाओं का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है. गांव में सड़क नहीं है और बरसात के दिनों में गांव टापू बनकर रह जाता है. ग्रामीणों की शिकायत है कि कई लाभुक ऐसे हैं जिनको शौचालय भी नही मिला. बिचौलियों ने शौचालय का रुपया भी निकाल लिया लेकिन शौचालय पूरी तरह बनकर तैयार नहीं हुआ .आज भी लोग शौच के लिए खुले में जाने को मजबूर हैं.

गांव में 6 चापा नल है लेकिन 2 नल ठीक हैं, बाकी खराब पड़े हुए हैं जिससे गांव में पेयजल की समस्या लगातार  बनी रहती है. ग्रामीण पीने के लिए झरने के पानी का उपयोग करते हैं. आपात स्थिति में बीमार मरीज को बहँगी  से टांग कर  6 किमी दूरी तय करने के बाद  ऑटो से हॉस्पीटल पहुंचाया जाता है. वहीं गांव में स्कूल में पढ़ाई होती नहीं. ग्रामीणों का कहना है कि पिछले 12 सालों से आंगनबाड़ी केन्द्र खुद बीमार पड़ा हुआ है… पढ़ाई की उचित व्यवस्था नहीं होने की वजह से गांव के बच्चे यूं ही भटकते रहते हैं.

बता दें कि केंद्र सरकार ने ऐसे कई गांव को चुन कर अरबन मिशन के तहत उसे संवारा जा रहा है. शहर की तरह गांव को स्मार्ट बनाने की योजना बनाई गई है, जिसके तहत सरकार की ओर 15 करोड़ की राशि साल में दिया गया है. 3 साल की योजना में 45 करोड़ दिया गया है. शहर से सटे गांवों में शौचालय, रोड, लाइट और पढ़ाई की व्यवस्था की जानी थी लेकिन प्रशासनिक उदासीनता की वजह से विकास नहीं हो सका. जनप्रतिनिधि भी अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते. इस संबंध में मिशन बदलाव से जुड़े प्रेम कच्छप ने अपर समाहर्ता सुधीर कुमार गुप्ता से मिले और विकास से संबंधित ज्ञापन सौंपा. अधिकारी ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिलाया.

बहरहाल पूरे मामले में गुमला जिला प्रशासन की लापरवाही सामने आ रही है. सरकार की योजनाओं को धरातल नहीं उतारा जा रहा है जिसका दंश ग्रामीणों को भुगतना पड़ता है. उम्मीद है कि सरकारी पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि इस दिशा में पिछली गलती से सीखते हुए अपना दायित्व निभायेंगे और गांव में सरकारी योजनाओं को लागू करवायेंगे.