मरांग बुरु बचाओ भारत यात्रा पहुंचा दिल्ली, केंद्र के नेताओं से हुई बातचीत

नई दिल्ली। मरांग बुरु बचाओ भारत यात्रा का 26 वां पड़ाव 15 फरवरी से 21 फरवरी 2023 तक नई दिल्ली था। दिल्ली प्रवास के दौरान मारंग बुरू, सरना धर्म कोड आदि मुद्दों पर केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते, अर्जुन मुंडा, बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह, जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष हर्ष चौहान, उपाध्यक्ष अनंत नायक, दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ आदिति नारायण पासवान, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ संजय पासवान, आर एस एस के बौद्धिक चिंतक इंद्रेश कुमार आदि से सकारात्मक बातचीत हुई। मरांग बुरू बचाओ यात्रा वास्तव में आदिवासी बचाओ यात्रा है। लक्ष्यों की प्राप्ति तक सालखन मुर्मू और सुमित्रा मुर्मू के नेतृत्व में यात्रा चालू रहेगा।

मरांग बुरू सवंता सुसार गांवता के नेता सिकंदर हेंब्रम और बुधन हंसदा, मधुबन (पीरटांड़), गिरिडीह के आमंत्रण पर कल 23 फरवरी 2023 को बाहा पर्व के शुभ अवसर पर पारसनाथ पहाड़ में शामिल होंगे। तत्पश्चात गिरिडीह जिला और संथाल परगना का यात्रा करेंगे। 27 फरवरी 2023 को दुमका में सेंगेल का आदिवासी मुद्दों के लिए विशाल मशाल जुलूस निकाला जायेगा। जिसमें 5 प्रदेश के सेंगेल नेतागण शामिल होंगे।

इधर बंगाल विधानसभा में झारखंड विधानसभा की तरह 17 फरवरी 2023 को सरना धर्म कोड की अनुशंसा होने से सरना धर्म कोड की मान्यता आंदोलन को जरूर बल मिला है। उम्मीद है उड़ीसा विधानसभा से भी जल्द ऎसा प्रस्ताव पारित होगा। अन्यथा सेंगेल नवीन सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू करेगा। परंतु झामुमो और टीएमसी नेता क्रमशः “सरना – आदिवासी” और “सारी – सरना” के नाम से प्रस्ताव पारित किया है। केवल सरना धर्म कोड नहीं। जिसका मकसद वोट और राजनीति ज्यादा है। प्रकृति पूजक आदिवासियों के लिए यह ईमानदार प्रयास नहीं है। अन्यथा अबतक चालू संसद सत्र में टीएमसी और कांग्रेस(झामुमो) के सांसद लोकसभा और राज्यसभा में नियमत: मामले को उठा सकते थे। सेंगेल मरांग बुरू बचाओ, सरना धर्म कोड लागू करो, कुर्मी को एसटी नहीं बनाओ, आदि मुद्दों पर संघर्ष जारी रखेगा। महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और मान्यवर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भरोसा बनाए रखेगा। मगर आंदोलन जारी रखेगा।