चुनाव प्रक्रिया के सवालों पर बाबूलाल मरांडी का राहुल गांधी पर पलटवार

चुनाव प्रक्रिया के सवालों पर बाबूलाल मरांडी का राहुल गांधी पर पलटवार

गिरिडीह: चुनाव प्रक्रिया, ईवीएम और मतदाता सूची को लेकर कांग्रेस की ओर से उठाए जा रहे सवालों के बीच झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा है। सोमवार को गिरिडीह में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया और कहा कि विपक्ष लगातार चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।

मरांडी ने कहा कि 2014 में केंद्र की सत्ता से बाहर होने के बाद कांग्रेस और विपक्ष की ओर से अलग-अलग मुद्दों पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। उन्होंने ईवीएम, राफेल, फोन टैपिंग और अब ‘वोट चोरी’ के आरोपों का जिक्र करते हुए कांग्रेस के दावों पर सवाल उठाया।

EVM और ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर साधा निशाना

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस की ओर से लगातार नए मुद्दे उठाए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे बयानों से लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने अपने बयान में ईवीएम को लेकर पहले उठाए गए सवालों का भी उल्लेख किया। साथ ही ‘वोट चोरी’ के आरोपों को भी कांग्रेस के राजनीतिक दावों का हिस्सा बताया।

हालांकि, चुनाव प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस और भाजपा के नेताओं के आरोप-प्रत्यारोप राजनीतिक दावों के रूप में देखे जाने चाहिए। इनके संबंध में अलग-अलग पक्षों की अपनी व्याख्या है।

राहुल गांधी पर बाबूलाल की तीखी टिप्पणी

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बाबूलाल मरांडी ने राहुल गांधी पर व्यक्तिगत टिप्पणी भी की। उन्होंने कांग्रेस को राहुल गांधी का इलाज विदेश में कराने की सलाह दी और कहा कि अगर पार्टी ने ऐसा नहीं किया तो 2029 के चुनाव तक कांग्रेस को राजनीतिक नुकसान हो सकता है।

यह टिप्पणी बाबूलाल मरांडी का राजनीतिक बयान है। इसे किसी चिकित्सकीय निष्कर्ष के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

मरांडी ने राहुल गांधी की चुनाव प्रक्रिया को लेकर बयानबाजी पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस को चुनाव से जुड़े आरोपों के बजाय ठोस तथ्यों के साथ अपनी बात रखनी चाहिए।

चुनाव आयोग के फैसलों पर भी उठाया सवाल

हाल के दिनों में निर्वाचन आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर सामने आई रिपोर्टों का भी इस राजनीतिक विवाद में उल्लेख हो रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक निर्वाचन आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कई फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें मतदाता सूची, नए मतदाताओं के पंजीकरण, नाम हटाने और बहाल करने तथा मतदाता डेटा से जुड़े मुद्दे शामिल थे।

हालांकि, निर्वाचन आयोग ने इन रिपोर्टों के बाद स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत स्तर पर दिए गए सुझाव या आपत्तियां आयोग के अंतिम फैसले के बराबर नहीं हैं। आयोग के अनुसार SIR समेत उसके सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए।

2029 चुनाव को लेकर भी मरांडी ने कांग्रेस पर साधा निशाना

बाबूलाल मरांडी ने अपने बयान में 2029 के लोकसभा चुनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि अगर कांग्रेस इसी तरह चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाती रही तो इसका असर पार्टी की राजनीतिक स्थिति पर पड़ेगा।

उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों से चुनावी आरोपों को लेकर पर्याप्त प्रमाण सामने रखने की बात कही। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से SIR और अन्य फैसलों को लेकर सर्वसम्मति का स्पष्टीकरण दिए जाने को उन्होंने विपक्ष के आरोपों के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया।

इस पूरे मामले में फिलहाल कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। चुनाव प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अलग-अलग दलों के दावे सामने आ रहे हैं, जबकि आयोग ने अपने हालिया स्पष्टीकरण में अंतिम फैसलों को सर्वसम्मत बताया है।

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