रांची: जनता के पिच पर शह और मात का खेल-खेल रही पार्टियां

  • कोल ब्लॉक नीलामी पर बीजेपी का पलटवार

  • राज्य और देशहित से खिलवाड़ कर रही राज्य सरकार 

इन दिनों कोयले की धधकती आग से झारखंड राज्य गर्म है। क्योंकि इस कोयले की आग पर राजनीति की सेंकाई हो रही है जिससे उसकी चमक बनी रहे। यही नहीं इसकी आंच दिल्ली तक भी पहुंच गई है।

इस आग पर किसकी राजनीतिक चमक बढ़ती है, ये तो वक्त बताएगा। जी हां, मेरा इशारा कोल ब्लॉक नीलामी की तरफ है।  दरअसल राज्य की राजनीति कोल ब्लॉक नीलामी को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने खड़े हैं।

जहां राज्य में सत्ता पक्ष कोल निलामी को लेकर कोर्ट की दरवाजे तक पहुंच गई है। वहीं बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने कोल ब्लॉक नीलामी को लेकर राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा और कहा कि राज्यहित और देशहित के साथ राज्य सरकार खिलवाड़ कर रही है।

उन्होंने गत वित्तीय वर्ष के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि देश में 958 मिलियन टन कोयले की खपत हुई, जबकि उत्पादन महज 707 मिलियन टन का ही हुआ। 251 मिलियन टन कोयले का आयात पिछले वर्ष विभिन्न देशों से किया गया।

 सिर्फ कोयले के आयात में 1.5 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा खर्च हुई। उन्होंने कोल ब्लॉक नीलामी से जुड़े हितों की चर्चा करते हुए कहा कि इससे न सिर्फ विदेशी मुद्रा की बचत होगी बल्कि अवैध खनन भी रुकेगा, रोजगार के साधन भी सृजित होंगे।

वहीं दूसरी तरफ जेएमएम के सुप्रियो भट्टाचार्च ने बीजेपी पर आरोप लगाकर अडाणी और अंबानी को डायरेक्ट फायदा देने की कही। उन्होंने कहा कि बीजेपी की इस नीति से कुछ चंद लोगों को ही लाभ मिलेगा। बीजेपी के विदेशी पूंजी वाली बात पर पलटवार करते हुए कहा कि विदेशी कंपनियां यहां आकर कम लागत में उन्हें माइनिंग मिलेगी जिससे कम दाम पर कोयले को बेचे देंगे। जिससे राज्य को नुकसान है।