बंगाल में सत्ता बदलते ही TASLIMA के आए ‘अच्छे दिन’

बंगाल में सत्ता बदलते ही TASLIMA के आए ‘अच्छे दिन’, 20 साल बाद कोलकाता में वापसी

पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलते ही बांग्लादेशी मूल की लेखिका TASLIMA नसरीन के ‘अच्छे दिन’ आ गए हैं. वह 20 साल बाद बंगाल पहुंच रही हैं. कोलकाता में एक अगस्त को एक आयोजन में वह हिस्सा लेंगी. 2007 में तसलीमा नसरीन के खिलाफ बंगाल में विरोध प्रदर्शन हुए थे. इसके बाद उन्हें बंगाल छोड़कर निकलना पड़ा था. तब राज्य में लेफ्ट की सरकार थी, फिर ममता बनर्जी को 2011 से सत्ता मिल गई थी. लेकिन अब तक वह बंगाल नहीं जा सकी थीं. कई आयोजनों में उनका जाना तय हुआ था, लेकिन विरोध के कारण कार्यक्रम ही रद्द कर दिए गए या फिर सरकार ने उन्हें न आने की ही सलाह दी थी.

यह आयोजन कोलकाता में सेकुलर मिशन नाम की संस्था द्वारा आयोजित किया जा रहा है. इसके आयोजनकर्ताओं में उस्मान मलिक, शांतनु सिन्हा और मोहित रे शामिल हैं. कोलकाता के रविंद्र सदन में यह आयोजन रखा गया है. इस आयोजन के लिए जो बैनर बना है, उसका शीर्षक ही है- 20 साल बाद तस्लीमा नसरीन की वापसी।

 

TASLIMA नसरीन के बारे में

TASLIMA नसरीन जन्म 25 अगस्त 1962 में हुआ था। परन्तु वास्तव में उनका जन्म पांच सितंबर 1960  को तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) के मयमनसिंह शहर में हुआ था।  वे  बांग्ला लेखिका एवं भूतपूर्व चिकित्सक हैं जो 1994 से बांग्लादेश से निर्वासित हैं। 1970 के दशक में एक कवि के रूप में उभरीं तसलीमा 1990 के दशक के आरम्भ में अत्यन्त प्रसिद्ध हो गयीं। वे अपने नारीवादी विचारों से युक्त लेखों तथा उपन्यासों एवं इस्लाम एवं अन्य नारीद्वेषी मजहबों की आलोचना के लिये जानी जाती हैं।उन्होंने 1990 के दशक की शुरुआत में अपने निबंधों और उपन्यासों के कारण वैश्विक ध्यान प्राप्त किया, जो नारीवादी विचारों और आलोचनाओं के साथ था कि वह इस्लाम के सभी “गलत” धर्मों के रूप में क्या करती हैं। वह प्रकाशन, व्याख्यान और प्रचार द्वारा विचारों और मानवाधिकारों की आजादी की वकालत करती है।

हालांकि कोलकाता में मुसलमानों के विरोध के बाद उन्हें कुछ समय के लिये दिल्ली और उसके बाद फिर स्वीडन में भी समय बिताना पड़ा लेकिन इसके बाद जनवरी 2010 में वे भारत लौट आईं। उन्होंने भारत में स्थाई नागरिकता के लिये आवेदन किया है लेकिन भारत सरकार की ओर से उस पर अब तक कोई निर्णय नहीं हो पाया है। यूरोप और अमेरिका में एक दशक से भी अधिक समय रहने के बाद, तस्लीमा 2005 में भारत चले गए, लेकिन 2008 में देश से हटा दिया गया, हालांकि वह दिल्ली में रह रही है, भारत में एक आवासीय परमिट के लिए दीर्घावधि, बहु- 2004 के बाद से प्रवेश या ‘एक्स’ वीज़ा। उसे स्वीडन की नागरिकता मिली है।

स्त्री के स्वाभिमान और अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए तसलीमा नसरीन ने बहुत कुछ खोया। अपना भरापूर परिवार, दाम्पत्य, नौकरी सब दांव पर लगा दिया। उसकी पराकाष्ठा थी देश निकाला। नसरीन को रियलिटी शो बिग बॉस 8 में भाग लेने के लिए कलर्स (टीवी चैनल) की तरफ से प्रस्ताव दिया गया है। तसलीमा ने इस शो में भाग लेने से मना कर दिया है

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