रांचीः झारखंड हाईकोर्ट ने लिया अवैध निर्माण पर एक्सन,निगम हुई रेस
- By admin --
- 15 Jul 2020 --
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रांची नगर निगम झारखंड हाईकोर्ट के मिली फटकार के बाद निगम के इंजीनियरों की टीम ने अपर बाजार का सर्वे शुरू कर दिया। अपर बाजार में वीणा वस्त्रालय से लेकर अन्य गलियों में स्थित भवनों के नक्शा की जांच की गई। हालांकि कई दुकानदारों ने भवन का नक्शा नहीं दिखाया।
उन्होंने बताया कि 50 वर्ष पुराने भवन बने हुए हैं। उस समय नक्शा पास नहीं होता था। निगम के इंजीनियरों ने भवन के पार्किंग, फायर बिग्रेड के वाहन के घुसने की व्यवस्था सहित अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
नालियों का अतिक्रमण कर दुकान बनाया
बताते चलें कि राजधानी रांची में अवैध निर्माण का जाल बिछ गया है। शहर में डेढ़ लाख से अधिक भवन ऐसे हैं, जिसका नक्शा पास नहीं है। लेकिन सबसे खराब स्थिति अपर बाजार क्षेत्र की है, जहां अवैध तरीके से 10 से 12 फीट की गली में पांच-छह मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग खड़ी कर दी गई है।
50 से अधिक भवन ऐसे हैं, जहां कई दुकानें अवैध तरीके से बना ली गई हैं। यहां तक कि बेसमेंट में भी दुकानें खोल दी गई हैं। कई स्थानों पर नालियों का अतिक्रमण कर दुकान बना लिया गया है। इसे हाईकोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए नगर निगम को अपर बाजार की सभी भवनों की जांच का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट की फटकार पर टूटती है अफसरों की नींद
अवैध निर्माण से संबंधित मामले पर हाईकोर्ट जब-जब अफसरों को फटकार लगाता है, तभी अफसरों की नींद टूटती है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर नोटिस और लेन-देन करके मामला रफा-दफा कर दिया जाता है। अपर बाजार के मामले में भी ऐसा ही हुआ है।
झारखंड हाईकोर्ट ने अपर बाजार में बेसमेंट में चल रही दुकानों की सूची नगर निगम से 2 वर्ष पहले ही मांगा था, लेकिन निगम के इंजीनियरों को मात्र 12 ही ऐसे भवन मिले, जहां बेसमेंट में दुकानें चल रही थीं। इनके खिलाफ अवैध निर्माण का केस दर्ज करते हुए सिर्फ नोटिस-नोटिस खेल रहे हैं। किसी पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई।
अफसर-बिल्डरों के मेल से बिछा अवैध निर्माण का जाल
नगर निगम के अफसर हाईकोर्ट का आदेश भी नहीं मानते हैं। 2011 में तत्कालीन चीफ जस्टिस भगवती प्रसाद ने अवैध निर्माण पर शहर के सभी भवनों की जांच करने का आदेश सरकार को दिया था।
उन्होंने आरआरडीए द्वारा पास किए गए करीब 1500 बहुमंजिला भवनों के नक्शा की सीबीआई जांच का आदेश दिया था, लेकिन किसी भवन पर कार्रवाई नहीं हुई। इसका असर हुआ कि अफसर और बिल्डरों की गठजोड़ से शहर में अवैध निर्माण का जाल बिछ गया।