रांची: स्कूल प्रबंधन एवं कर्मचारियों की मानसिक पीड़ा जानलेवा- आलोक दूबे
- By admin --
- 01 Jul 2020 --
- comments are disable
-
‘निजी स्कूलों, छात्र-छात्राओं व अभिभावकों की परेशानी की अनदेखी’
-
‘प्राईवेट स्कूलों के प्रति सरकार का सौतेलापन व्यवहार बर्दाश्त नहीं’
स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन (पासवा) के झारखंड प्रदेश इकाई के अध्यक्ष आलोक कुमार दूबे ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कोरोना काल में मुश्किल में घिरे निजी स्कूलों, छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों की समस्याओं के प्रति कोई ध्यान नहीं दिया।
पासवा के अध्यक्ष ने कहा कि प्राईवेट स्कूलों के प्रति सरकार का सौतेलापन व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी प्राईवेट स्कूलों और उनके स्टाफ ने ई-मेल द्वारा प्रधानमंत्री और मानव संसाधन मंत्रालय को अपनी विषम आर्थिक स्थिति से अवगत कराया है और लॉकडाउन के कारण उत्पन्न समस्याओं की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि पूरे झारखंड से करीब दो लाख लोगों के माध्यम से यह संदेश प्रधानमंत्री को भेजा गया है। प्राईवेट स्कूलों को सुचारू रूप से चलाने का फीस ही एकमात्र साधन है। मार्च से फीस न आने के कारण विद्यालय अपने शिक्षक और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों को वेतन देने में असमर्थ है और सभी के लिए जीवनयापन करना अब मुश्किल हो रहा है।
आलोक दूबे ने बताया कि विद्यालय प्रबंधन एवं समस्त कर्मचारी अत्यधिक मानसिक तनाव और पीड़ा से गुजर रहे हैं, जो जानलेवा साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि गरीबों और किसानों के लिए योजना बनाते समय सरकार यह कैसे भूल सकती है कि सभी के बच्चों का भविष्य बनाने वाले शिक्षक आज भुखमरी की कगार पर आ गये हैं।
क्या सरकार का उनके प्रति कोई दायित्व नहीं बनता। उन्होंने आग्रह किया कि सरकार सभी प्राइवेट विद्यालयों को सरकारी स्कूलों में प्रति छात्र पर होने वाले खर्च के अनुसार आर्थिक अनुदान दें और लॉकडाउन तक यह सहायता जारी रखे।