डॉलर के मुकाबले पाउंड निचले स्तर पर,रुपये में गिरावट की 4 वजह

डॉलर के मुकाबले ब्रिटिश पाउंड चार दशक के निचले स्तर पर,रुपये में गिरावट की 4 वजह

ब्रिटेन की नई सरकार द्वारा करों में कटौती और खर्च को बढ़ावा देने की योजना सामने आने के बाद सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ब्रिटिश पाउंड में तेज गिरावट हुई। पाउंड सोमवार को शुरुआती कारोबार में 1.0349 प्रति अमेरिकी डॉलर के निचले स्तर तक गिर गया, हालांकि बाद में इसमें थोड़ा सुधार हुआ और यह 2.3 प्रतिशत कमजोरी के साथ 1.0671 प्रति डॉलर के भाव पर था। बाद में 0.93 पर बंद हुआ।

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RBI की कोशिश के बाद भी डॉलर के मुकाबले रुपये (Dollar Vs Rupee) में गिरावट जारी है। सोमवार को एक डॉलर की कीमत बढ़कर 81.67 रुपये पर पहुंच गई जो अब तक निम्नतम स्तर है। कमजोर रुपये का असर रसोई घर से लेकर दवा और मोबाइल खरीदने पर भी होता है।

भारत कच्चा तेल समेत कई जरूरी वस्तुओं का आयात करता है जो रुपये के कमजोर होने से महंगा हो जाएगा। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर डॉलर की बढ़ती मांग और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से रुपये में गिरावट आ रही है।

ब्रिटिश पाउंड में भी ऐतिहासिक गिरावट

डॉलर के मुकाबले रुपया समेत अधिकतर विदेशी मुद्राओं में गिरावट दर्ज की गई है। ब्रिटिश पाउंड में भी ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। रुपये में गिरावट को थामने के लिए रिजर्व बैंक पिछले कुछ माह में 30 अरब डॉलर से ज्यादा की राशि बाजार में डाल चुका है।

दवाएं, मोबाइल, टीवी के दाम बढ़ेंगे

भारत जरूरी इलेक्ट्रिक सामान और मशीनरी समेत कई दवाओं का भारी मात्रा में आयात करता है। अधिकतर मोबाइल और गैजेट का आयात चीन और अन्य पूर्वी एशिया के शहरों से होता है। अगर रुपये में इसी तरह गिरावट जारी रही तो आयात महंगा हो जाएगा और आपको ज्यादा खर्च करना होगा।