पलक झपकते ही अब आप पहुंच जाएंगे रांची से टाटा ! हाइपरलूप का सपना होगा साकार

 

टाटा से रांची के बीच हाइपरलूप का सपना होगा साकार, IIT मद्रास के सफल परीक्षण से बढ़ी उम्मीदें

 

रांची : टाटा से रांची के बीच हाई-स्पीड यात्रा का सपना जल्द ही हकीकत बन सकता है।  भारतीय रेलवे के सहयोग से आइआइटी मद्रास द्वारा किये गये सफल हाइपरलूप परीक्षण के बाद इस प्रोजेक्ट की संभावनाएं और मजबूत हो गयी है। टाटा स्टील भी इस महत्वाकांक्षी परियोजना में सक्रिय रूप से शामिल है।

भारत देश अब दुनिया की सबसे लंबी हाइपरलूप टेस्ट फैसिलिटी बनाने की तैयारी में जुट गया है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना भारतीय रेलवे और आईआईटी मद्रास के सहयोग से शुरू की जा रही है, जिसके तहत हाइपरलूप तकनीक को अगले स्तर पर ले जाने की योजना है।

 

भारतीय रेलवे, लार्सन एंड टुब्रो कंस्ट्रक्शन और आईआईटी मद्रास के सहयोग से 422-मीटर की वैक्यूम ट्यूब परीक्षण सुविधा स्थापित की गई थी। इस परियोजना में अहम भूमिका निभाने वाला TuTr हाइपरलूप, आईआईटी मद्रास द्वारा इनक्यूबेटेड एक डीप-टेक स्टार्टअप है, जिसने हाल ही में भारत की पहली कॉमर्शियल हाइपरलूप पॉड का परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव  ने इस प्रगति पर खुशी जताते हुए कहा, “यह भारत के लिए परिवहन के भविष्य को फिर से परिभाषित करने का मौका है। हाइपरलूप तकनीक से न सिर्फ यात्रा का समय कम होगा, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी अनुकूल होगी।”

भारतीय रेलवे और आईआईटी मद्रास का सहयोग

एक आधिकारिक बयान में बताया गया कि भारतीय रेलवे और आईआईटी मद्रास मिलकर वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग व्हीकल विकसित करने की योजना बना रहे हैं, जिसके लिए रेलवे द्वारा वित्तीय सहायता दी जाएगी। स्विसपॉड टेक्नोलॉजीज के सीईओ और सह-संस्थापक डेनिस टुडोर ने कहा, “भारत में हाइपरलूप तकनीक की अपार संभावनाएं हैं। अनुमान के अनुसार, 40 किलोमीटर लंबा परीक्षण ट्रैक बनाने में 150 से 300 मिलियन डॉलर की लागत आएगी।” मार्च 2022 में स्विसपॉड और TuTr ने एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसे स्विस और भारतीय सरकारों का समर्थन प्राप्त है।