रांची। सीएम ने आदिवासी हित में दिया सही बयान- सालखन

झारखंड के माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा हार्वर्ड के ऑनलाइन कान्फ्रेंस और नीति आयोग की बैठक में पीएम को आदिवासियों के संदर्भ में बोले गए चिंता और अभिव्यक्ति बिल्कुल सही हैं। स्वागतयोग्य है। आदिवासियों की दुर्दशा के लिए केंद्र सरकारें बिल्कुल दोषी हैं। जिन्होंने संविधानसम्मत नीतियों और प्रावधानों को अबतक पूर्णत: लागू नहीं किया है।

दूसरी तरफ झामुमो ने भी झारखंड प्रदेश में पांच बार मुख्यमंत्री और हमेशा विरोधी दल के नेता बनने के बावजूद आदिवासी हितों में नीतिगत कोई भी काम नहीं किया है। केवल वोट और सत्ता के लिए बोलना और आदिवासियों को भावनात्मक रूप से छलने का काम किया है। झामुमो चाहती तो अब तक झारखंड में संविधानसम्मत स्थानीयता और रोजगार नीति लागू हो जाती। हिंदी के साथ संताली झारखंड की प्रथम राजभाषा बन जाती। TAC कार्य करती। सरना धर्म कोड को लटकाने- भटकाने की जगह जोरदार जन आंदोलन कर भाजपा की केंद्र सरकार को मजबूर कर देती। बाकि सीएनटी- एसपीटी कानून को खुद तोड़ने की जगह लागू कर देती। पेसा पंचायत कानून 1996, समता फैसला 2007, वन अधिकार कानून 2006 आदि को खुद लागू कर झारखंडी जन को विस्थापन पलायन आदि से मुक्ति दिला सकती। सिदो मुर्मू और बिरसा मुंडा के वंशजों के लिए ट्रस्ट बना सकती । जिनके बलिदानों का प्रतिफल है एसपीटी- सीएनटी कानून।

झामुमो आदिवासी समाज को केवल अपनी वोट और सत्ता सुख के लिए उपयोग करती रही है। अन्यथा आदिवासी समाज में व्याप्त नशापान, अंधविश्वास, ईर्ष्या द्वेष, वोट की खरीद- बिक्री (राजनीतिक कुपोषण) और आदिवासी स्वाशासन पद्धति में व्याप्त अव्यवस्था और कुरीतियों आदि को दूर करने का सघन काम कर सकती। जो झामुमो ने अब तक नहीं किया है। खैर हेमंत सोरेन की अभिव्यक्ति से आदिवासी विरोधियों को जलन स्वाभाविक है मगर अभिव्यक्ति को व्यवहार में उतारने की जरूरत ज्यादा है।

असा बंगाल चुनाव में सरना धर्म कोड बिरोधी भाजपा का जोरदार बिरोध करेगी। चूंकि यह आदिवासियों को जबरन हिन्दू बनाने पर आमादा है। अतः असा TMC को सहयोग कर सकती है। कल से सालखन मुर्मू बंगाल में सरना धर्म कोड जनसभाओं को सम्बोधित करेंगे। जो निम्न है :- 24.2.2021 हूगली ज़िला के गुड़ाप में। 25 को बिहार के कटिहार, 26 को नार्थ दिनाजपुर के इस्लामपुर, 27 को दक्षिण दिनाजपुर के बालुरघाट और 28 फरवरी को मालदा ज़िला के गाजोल में। रविवार, 7 मार्च को गाजोल में करीब एक लाख लोगों की विशाल सरना धर्म कोड जनसभा का आयोजन कर ममता बनर्जी का समर्थन भी किया जा सकता है। ज्ञातव्य हो कि TMC ने सरना धर्म कोड का समर्थन कर दिया है। कैबिनेट में प्रस्ताव भी पारित कर केंद्र को प्रेषित कर दिया है। TMC सांसद पार्लियामेंट में भी इसको उठाने वाले हैं। हाल में 19,20,21 फरवरी 21 को सालखन मुर्मू ने बंगाल के पश्चिम मेदनीपुर और झाड़ग्राम जिलों में 3 सरना धर्म कोड जनसभाओं को संबोधित किया है। जो चुनाव को प्रभावित करते हैं।