रांचीः नेताओं ने दी शहीदों को श्रद्धांजलि, नहीं मिला इतिहास में उचित स्थान

अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष के प्रतीक हूल दिवस के मौके पर पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आज प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से राजधानी रांची के सिद्धो कान्हू ,चांद भैरो,फूलो झानो को याद किया एवं पार्क स्थित सिदो-कान्हू की  प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

आदिवासी कांग्रेस के रांची  जिला अध्यक्ष बेलस तिर्की के नेतृत्व में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। मौके पर अमर शहीद सिदो कान्हू  ,फूलो-झानो की शहादत को नमन करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि झारखंड का इतिहास संघर्षों से रचा बसा हुआ है।

विरासत की रक्षा को लेकर संघर्ष

 उन्होंने कहा कि प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के पहले ही आदिवासी समाज ने अपनी परंपरा और विरासत की रक्षा को लेकर अंग्रेजो के खिलाफ संघर्ष किया, जिसके परिणाम स्वरूप एसपीटी और सीएनटी कानून बनाया गया।

राज्य में 16 साल रही बीजेपी की शासन

सिद्धू कान्हू के वंशज को लेकर की रही  राजनीति पर डा. उराँव ने कहा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि झारखंड में करीब 16 वर्षों तक भाजपा की सरकार रही। इस दौरान आदिवासियों के विकास और उनके कल्याण के लिए सरकार ने कोई कदम नहीं उठाएं। उन्होंने कहा कि लीज की जमीन लेकर पक्का मकान बनाया गया और यह आज भी जारी है बाबूलाल जी और भाजपा इसके खिलाफ आन्दोलन करे हम उनके साथ हैं।

जनजातीय के विकास के लिए सरकार उठा रही कदम

डा. उरांव ने कहा कि एक प्रकरण को लेकर भाजपा जितना उद्वेलित हो रही है सोलह साल के अपने कार्यकाल में उस परिवार के लिए और संथाल के लोगों के लिए क्या किया इसका जवाब देना चाहिए। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार गठन के बाद जनजातीय समाज के विकास के लिए सरकार ने कदम उठाए हैं।

इतिहास नहीं मिला उतित स्थान

इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि अमर शहीद सिदो-कान्हू, फूलो और झानू की शहादत को इतिहास में पहला स्थान नहीं मिल पाया जिसकी वे हकदार थी। उन्होंने बताया कि अंग्रेजी शासन की ज्यादती के खिलाफ महिला होते हुए भी फूलो और झानो ने अपनी वीरता दिखाई और 21 अंग्रेजी सैनिकों को मार डाला। परंतु जिस तरह से रानी लक्ष्मीबाई की वीरता,बलिदान और संक्रांति को इतिहास में स्थान मिला वह स्थान हूल दिवस को नहीं मिल पाया।

संघर्ष के प्रतीक हूल दिवस

कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम ने कहा कि अन्याय जुल्मी व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष के प्रतीक हूल दिवस की शहादत को कभी भुला नहीं जा सकता है। शहीदों ने जिस सपने को लेकर अपनी शहादत दी थी राज्य सरकार उन सपनों को पूरा करने के लिए प्रयत्नशील है।