दावोस में सीएम हेमंत सोरेन ने विश्व के पटल पर रखी झारखंड की महत्ता !
- By rakesh --
- 22 Jan 2026 --
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#झारखण्ड वैश्विक साझेदारी, समावेशन और सतत विकास के साथ ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ के लिए एक जिम्मेदार वैश्विक केंद्र के रूप में उभरा
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दावोस/रांची
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और सुगम वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को लेकर बढ़ती अंतरराष्ट्रीय चिंताओं के बीच युवा झारखंड ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के इंडिया पवेलियन में आयोजित एक उच्चस्तरीय वैश्विक राउंड टेबल मीटिंग के माध्यम से क्रिटिकल मिनरल्स के लिए अपनी दीर्घकालिक और दूरदर्शी रणनीति प्रस्तुत की।
“झारखंड की क्रिटिकल मिनरल्स अवसर: भूविज्ञान से मूल्य सृजन तक” “Jharkhand’s Critical Minerals Opportunity: From Geology to Value Creation”विषय पर आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में नीति-निर्माताओं, शोध संस्थानों, अंतरराष्ट्रीय उद्योग जगत, निवेशकों और तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया। चर्चा का केंद्र रहा कि खनिज-संपन्न क्षेत्र किस प्रकार पारंपरिक खनन आधारित अर्थव्यवस्थाओं से आगे बढ़कर प्रसंस्करण, विनिर्माण और प्रौद्योगिकी-आधारित औद्योगिक विकास के वैश्विक केंद्र बन सकते हैं।
क्रिटिकल मिनरल्स पारिस्थितिकी तंत्र को दिशा देने की विशिष्ट स्थिति में झारखण्ड
झारखण्ड के आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल में शामिल सचिव अरवा राजकमल ने कहा कि ऊर्जा असुरक्षा और स्वच्छ प्रौद्योगिकियों की बढ़ती वैश्विक मांग के वर्तमान दौर में क्रिटिकल मिनरल्स अब केवल औद्योगिक संसाधन नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक सुरक्षा के प्रमुख स्तंभ बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि भारत के खनिज भंडार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होने के कारण झारखंड देश के क्रिटिकल मिनरल्स पारिस्थितिकी तंत्र को दिशा देने की विशिष्ट स्थिति में है। झारखंड की रणनीतिक भूमिका इस तथ्य से और अधिक सुदृढ़ होती है कि भारत सरकार द्वारा चिन्हित 24 में से 20 क्रिटिकल मिनरल्स राज्य में उपलब्ध हैं। यह स्थिति झारखंड को भारत के ऊर्जा संक्रमण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, उन्नत सामग्री (एडवांस्ड मैटीरियल्स) और स्वच्छ प्रौद्योगिकी से जुड़े दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्यों के केंद्र में स्थापित करती है।
उत्खनन से मूल्य सृजन की ओर बदलाव
अध्यक्ष एवरसोर्स कैपिटल एवं भारत सरकार के पूर्व वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने कहा कि खनिज-समृद्ध राज्यों को कच्चे संसाधनों के निर्यात तक सीमित न रहकर स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण और औद्योगिक उपयोग को प्राथमिकता देनी चाहिए। इससे राज्य में रोजगार सृजन, औद्योगिक विकास और दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने विकास और पर्यावरणीय संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
अगली पीढ़ी की अर्थव्यवस्था के लिए औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र
श्री वरुण रंजन, प्रबंध निदेशक, जियाडा (JIIDCO) ने उद्योग जगत का दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए ने मुख्यमंत्री के विजन 2050 के अंतर्गत झारखंड की दीर्घकालिक औद्योगिक रणनीति को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि झारखंड किस प्रकार उत्खनन-आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर मूल्य-आधारित औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र की ओर अग्रसर है, जिसमें विशेष रूप से खनिज प्रसंस्करण और परिष्करण, इलेक्ट्रिक वाहन घटक, मैग्नेट और उन्नत सामग्री, तथा बैटरी और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे एकीकृत औद्योगिक क्लस्टर राज्य में ही मूल्य सृजन को बनाए रखने, विनिर्माण निवेश आकर्षित करने और भारत की स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति शृंखला को सशक्त बनाने में सहायक होंगे।
साझेदारी करने का आह्वान
झारखंड सरकार के खनन निदेशक राहुल सिन्हा ने राज्य के क्रिटिकल मिनरल परिदृश्य का परिचय देते हुए उनके अन्वेषण और खनन को बढ़ावा देने हेतु वर्तमान सरकारी नीतियों एवं पहलों पर प्रकाश डाला। उन्होंने झारखंड में एक पारदर्शी और निवेश-अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया तथा देश-विदेश के निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के सभी हितधारकों से इस रणनीतिक प्रयास में झारखंड के साथ साझेदारी करने का आह्वान किया।
ज्ञान, कौशल और संस्थागत क्षमता
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के ग्लोबल सप्लाई चेन ऑब्ज़र्वेटरी के निदेशक डॉ. मुकेश कुमार ने कहा कि केवल संसाधनों की उपलब्धता ही वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने विशेष कौशल विकास, अनुसंधान सहयोग और मजबूत संस्थागत क्षमताओं की आवश्यकता पर जोर दिया, जिससे झारखंड वैश्विक मूल्य शृंखलाओं से प्रभावी रूप से जुड़ सके और खनिज संपदा को सतत आर्थिक परिणामों में परिवर्तित कर सके।
वक्ताओं ने क्या कहा…
बैठक में श्री डेनिस ने सतत खनिज विकास के लिए संस्थागत क्षमता की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने इन हाउस विश्वविद्यालय और शोध पारिस्थितिकी तंत्र, सरकारी अधिकारियों के लिए कौशल विकास और खनन व प्रसंस्करण क्षेत्रों में प्रवेश करने वाले छात्रों के प्रशिक्षण को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार मानव संसाधन और तकनीकी क्षमता दीर्घकालिक सफलता की नींव हैं।
इंजीनियरिंग, ESG और निवेश का भरोसा
डीएमटी ग्रुप के प्रतिनिधि श्री लुकास ने खनन और क्रिटिकल मिनरल परियोजनाओं पर एक तकनीकी और इंजीनियरिंग-आधारित दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने डीएमटी ग्रुप का परिचय दिया, जो 200 वर्षों से अधिक पुराने जर्मन खनन नवाचार अनुभव वाला तकनीकी और इंजीनियरिंग संगठन है। उन्होंने कहा कि निवेश निर्णय मुख्य रूप से नियामकीय स्पष्टता, घरेलू बनाम विदेशी निवेश से जुड़े रणनीतिक विकल्पों और मजबूत जोखिम-न्यूनकरण तंत्र पर निर्भर करते हैं। भूविज्ञान, प्रसंस्करण और भू-तकनीक के साथ-साथ ESG (पर्यावरण, सामाजिक और शासन) अब निवेशकों के विश्वास का केंद्रीय आधार बन चुका है।
वैश्विक आपूर्ति जोखिम और रणनीतिक खनिज
साइन रिसोर्सेज ग्रुप के प्रतिनिधि श्री बेन ने वैश्विक स्तर पर क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति में अत्यधिक भौगोलिक एकाग्रता से उत्पन्न जोखिमों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विश्व के लगभग 80 प्रतिशत पोलुसाइट (सीज़ियम अयस्क) का उत्पादन केवल एक ही खदान से होता है, जिससे वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएं असुरक्षित बनती हैं।
भारत–जर्मनी–यूरोपीय संघ: साझा चुनौतियां, साझा समाधान
श्री मार्टिन ने जर्मन कंपनियों और निवेशकों के दृष्टिकोण से कहा कि भारत जर्मनी और यूरोपीय संघ एक ही नाव में सवार हैं, तीनों ही क्रिटिकल कच्चे माल के लिए बाहरी आपूर्तिकर्ताओं पर अत्यधिक निर्भर हैं। उन्होंने इसे दीर्घकाल में अस्थिर बताते हुए आत्मनिर्भरता की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने हाल ही में लागू यूरोपीय संघ के क्रिटिकल रॉ मैटीरियल्स एक्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि खनन और प्रसंस्करण दोनों स्तरों पर बड़े पैमाने पर निवेश और तकनीकी सहयोग की आवश्यकता है। सैटेलाइट आधारित अन्वेषण और ड्रिलिंग डेटा के लिए एआई के उपयोग जैसी तकनीकों को उन्होंने भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया।
श्री मार्टिन ने भारत जर्मनी सहयोग को और गहराने की आवश्यकता पर बल देते हुए राज्य-स्तरीय साझेदारियों का सुझाव दिया और कहा कि जर्मनी की संघीय संरचना और भारत की राज्य-आधारित खनन व्यवस्था के बीच मजबूत समानताएं हैं। इस संदर्भ में झारखंड को एक प्रमुख साझेदार के रूप में देखा गया।
वित्त सचिव प्रशांत कुमार ने बैठक के समापन में कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स के अन्वेषण, खनन और प्रसंस्करण को समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाने के लिए एक उपयुक्त और सक्षम नीतिगत ढांचे की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नीतियां ऐसी हों जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण सुनिश्चित करें, ताकि भारत और झारखंड क्रिटिकल मिनरल्स की वैश्विक मूल्य शृंखला में प्रभावी और टिकाऊ रूप से अपनी स्थिति मजबूत कर सकें। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में शीघ्र प्रगति सुनिश्चित करने के लिए ब्राउनफील्ड खनन परियोजनाओं की संभावनाओं को प्राथमिकता के आधार पर उपयोग में लाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकांश क्रिटिकल मिनरल्स अन्य खनिजों के साथ सह-अस्तित्व (conjunction) में पाए जाते हैं, ऐसे में मौजूदा खनन क्षेत्रों का रणनीतिक विस्तार प्रारंभिक गति (early kick-start) प्रदान कर सकता है।
इस अवसर पर झारखंड सरकार द्वारा “झारखंड में क्रिटिकल मिनरल्स: परिदृश्य और अवसर” विषय पर एक विशेष फिल्म प्रदर्शित की गई, जिसमें राज्य की भूवैज्ञानिक क्षमता, उभरते अवसरों और निवेश संभावनाओं को रेखांकित किया गया। साथ ही, झारखंड में क्रिटिकल मिनरल्स पर आधारित एक कॉफी टेबल बुक का भी विमोचन किया गया, जो राज्य की खनिज संपदा, नीतिगत दृष्टि और भविष्य की रणनीति को प्रस्तुत करती है।
बैठक में यह संदेश उभरकर आया कि झारखंड अपने संसाधनों, नीतिगत दृष्टि, मानव पूंजी और वैश्विक साझेदारियों के बल पर क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में एक दीर्घकालिक, जिम्मेदार और सतत वैश्विक केंद्र के रूप में स्वयं को स्थापित कर सकता है।
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