बापू के डाक टिकटों का अनोखा कलेक्शन

महात्मा गांधी जयंती : बापू के डाक टिकटों का अनोखा कलेक्शन

  • बापू से जुड़ी डाक टिकटों का अनोखा संग्रह
  • विभूति भूषण राय ने बापू के डाक टिकटों को संजोया
  • महात्मा गांधी के हाथ से लिखा पोस्टकार्ड भी शामिल

शौक बड़ी चीज है, पर शौक को जुनून में बदलने का नाम है डॉ विभूति भूषण रॉय. जी हां, डॉ रॉय महात्मा गांधी और उनके दर्शन से इतने प्रभावित हुए कि इन्होंने गांधी जी के दुर्लभ डाक टिकटों को संजोना शुरू किया.

आज इनके पास दुर्लभ डाक टिकटों का एक अनुपम संग्रह है. ये हैं डॉक्टर विभूति भूषण राय जो भारतीय स्टेट बैंक के एचईसी एरिया ब्रांच में काम करते हैं. लेकिन ये इनका पूरा परिचय नहीं है.

इनको ख्याति मिली महात्मा गांधी के दुर्लभ डाक टिकट संग्रह करने के लिए. डॉ रॉय की दशकों की मेहनत , लगन और जुनून का ही नतीजा है कि आज इनके पास देश- विदेश की महात्मा गांधी से जुड़ी दुर्लभ डाक टिकट हैं. आजादी के पूर्व से लेकर आज तक कि बापू से जुड़ी डाक टिकटें संग्रहित हैं.

इन डाक टिकटों में ना केवल भारत बल्कि विदेशों में भी बापू से जुड़ी डाक टिकटें शामिल हैं. पेशे से बैंकर डॉक्टर विभूति भूषण राय के इस अजीबो-गरीब शौक का आलम ये है कि अगर राँची में डाक विभाग को बापू के जीवन से जुड़ी डाक टिकटों की प्रदर्शनी लगानी होती है तो वे भी डॉ रॉय से संपर्क करते हैं.

रांची के रहने वाले डॉक्टर विभूति भूषण राय भारतीय स्टेट बैंक के एचईसी सेक्टर- 2 में काम करते हैं.बापू के जीवन से जुड़ी डाक टिकटों को इकट्ठा करके रखना उनका बचपन से ही शौक रहा है. उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों और प्रदेशों से इकट्ठा कर इस संग्रह तैयार किया है.

इसके लिए उन्होंने अपने दोस्तों और सगे संबंधियों की भी मदद ली. डॉ रॉय को जब भी मौका लगता है वो अपने इस शौक को पूरा करने में लग जाते हैं.

डॉक्टर विभूति भूषण राय केवल बापू से जुड़ी टिकटों और पत्रों का ही संग्रह नहीं करते हैं बल्कि बापू को अपने अंदर आत्मसात करने की भी कोशिश करते हैं. यही नहीं डॉ रॉय की गांधी से जुड़ी इस अनुपम संग्रह में गांधी जी की लिखी पोस्टकार्ड भी शामिल है.

दरअसल गांधी जी ने अपने हाथों से छपरा के किसी अधिवक्ता को पोस्टकार्ड भेजी थी, वह पोस्टकार्ड इस संग्रह को अद्वितीय बना रहा है. डॉक्टर विभूति भूषण राय का मानना है कि विचार कभी मरा नहीं करते, जैसे गांधी जी के विचार.