रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सदस्यता को लेकर निगाहें राजभवन की ओर !

सत्ताधारी दल के विधायकों को बुलाया गया रांची

रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सदस्यता को लेकर राज्य में एक बार फिर से राजनीतिक हलचल तेज है। चुनाव आयोग की तरफ से मुख्यमंत्री पर ऑफिस ऑफ प्रफिट के मामले को लेकर फैसला आना है। आयोग की तरफ से झारखंड के राज्यपाल को फैसला से संबंधित दस्तावेज भेज दिए हैं। राज्यपाल रमैश वैस भी रांची पहुंच चुके हैं। इसके साथ ही राज्य में सत्ताधारी दल और विपक्ष दोनों के बीच हलचल तेज हो गई है।

जानकारी के अनुसार जिस मामले में चुनाव आयोग की रिपोर्ट राजभवन पहुंची है। इसपर कई तरह के कानूनी रूप से जानकारियां मिल रही है। अधिवक्ता धीरज कुमार का मानना है कि अगर तीन साल से कम के लिए कार्रवाई होती है, तो शायद मुख्यमंत्री की कुर्सी बच सकती है। लेकिन अगर तीन साल से अधिक के लिए कार्रवाई होती है, तो हेमंत सोरेन की मुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं बच सकती है।

सरकार पर कोई आंच नहीं- यूपीए

इधर राज्य में सत्ताधारी दल की तरफ से दावा किया जा रहा है कि उनकी सरकार पर इस पैसले को लेकर किसी तरह की आंच नहीं आनी है। सरकार में शामिल तमाम दल एकजुट हैं और सरकार के पास संख्याबल पहले से मौजूद है। अगर किसी तरह की विशेष परिस्थिति उत्पन्न होती है तो सरकार के सामने कई तरह के विकल्प खुले हुए हैं।

सत्ताधारी दल के तमाम विधायकों को पार्टी की तरफ से निर्देश जारी किए गए हैं कि वे रांची में ही रहे। खबर लिखे जाने के समय तक जानकारी है कि सत्ताधारी दल के सभी विधायकों को सीएम हाउस में बुलाया गया है, जहां एक बार फिर से संभावित परिस्थितियों पर चर्चा की जाएगी।

नेताओं के ट्विट से राजनीतिक सरगर्मी बढ़ी

इधर बीजेपी के सांसद निशिकांत दुबे और निर्दलीय विधायक सरयू राय ने ट्विट के माध्यम से जिस तरह से सरकार के अस्तित्व पर सवाल खड़े किए हैं, उससे आंशंका व्यक्त जरुर की जा रही है कि राज्य में हेमंत सोरेन को अपनी कुसी बचाना बचाना आसान नहीं है।

मुख्यमंत्री आवास में जुड़े तमाम पार्टियों के नेताओं की तरफ से राज्य में विकल्प पर चर्चा जारी है। जेएमएम झारखंड में सबसे बड़ी पार्टी है, इसलिए पार्टी का दावा है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी उन्ही की पार्टी के पास रहेगी।