रांची : स्थानीय नीति को लेकर एक बार फिर गरमा रहा राज्य का राजनीतिक माहौल

स्थानीय नीति को लेकर एक बार फिर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। मुख्यमंत्री ने  स्थानीय नीति पर कमेटी गठन करने की बात कर सभी दलों को एक बार फिर  राजनीति करने का मौका दे दिया है।

बंधु तिर्की  का कहना है कि स्थानीय नीति 1932 के आधार पर ही होना चाहिए। पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने स्थानीयता को परिभाषित करने के लिए सरकार के स्तर पर हुई पहल का स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि इसके लिए कमेटी का गठन अच्छी बात है, लेकिन यह सिर्फ छलावा साबित होगा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सदन में विशेष चर्चा कराने की आवश्यकता है। इससे पक्ष और विपक्ष दोनों को अपनी बातें रखने का मौका मिलेगा।

रघुवर की सरकार ने स्थानीय नीति को सही ढंग से परिभाषित नहीं किया -कांग्रेस

इस पर कांग्रेस का कहना है कि रघुवर की सरकार ने स्थानीय नीति को सही ढंग से परिभाषित नहीं किया था। जो यहां के स्थानीय आदिवासी , मूलवासी हैं, उन लोगो को अधिकार नहीं मिला था किसी भी क्षेत्र में। और इसमें तरह तरह की बाते उठती रहीं है। हमारी गठबंधन का राज्य की जनता से यह कमिटमेंट था कि था  जो भी त्रुटियां है, स्थानीय नीति में उसे सुधारा जायगा और यहां के लोगो के जो अधिकार और सम्मान है, वो दिया जायगा।

स्थानीय नीति में संशोधन के पक्ष में नहीं है भाजपा

इस पर भाजपा का कहना है कि वह स्थानीय नीति के पक्ष में नहीं है।पूर्व में जब अर्जुन मुंडा के समय हेमंत जी को स्थानीय नीति पर काम करने के लिए कहा गया तो गठबंधन सरकार से समर्थन वापस लेकर सरकार गिरा दी। साथ ही भाजपा ने कहा कि वर्तमान सरकार स्थानीय नीति पर सदन में प्रस्ताव लाए। जेएमएम की तरह हम अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हटेंगे, हम अपना सुझाव भी देंगे।

झारखण्ड में हमेशा से स्थानीय नीति पर राजनीति होती आयी है

झारखण्ड में हमेशा से स्थानीय नीति पर राजनीति होती आयी है। स्थानीय नीति सूबे के लिए एक ऐसा मुद्दा है जो सरकार भी गिरा चुकी है, इसीलिए सभी दूर से ही राजनीति करते नजर आते हैं।