हाई कोर्ट से भी नहीं मिली राहत, अब रांची कोर्ट ने जब्त की बीएसआरटीसी की बस
- By rakesh --
- 30 Oct 2026 --
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रांची: सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिवार को मुआवजा राशि का भुगतान नहीं करने पर बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (बीएसआरटीसी) की एक बस शुक्रवार को जब्त कर ली गई। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी), रांची के कुर्की आदेश के तहत यह कार्रवाई की गई। जब्त बस को रांची सिविल कोर्ट परिसर में रखा गया है। मुआवजे की बकाया राशि का भुगतान होने के बाद ही बस को मुक्त किया जा सकेगा।
निगम को मूल मुआवजे के रूप में 93.38 लाख रुपये के साथ ब्याज मिलाकर करीब 1.15 करोड़ रुपये का भुगतान करना है। सिविल कोर्ट के नाजिर जीशान इकबाल और अधिवक्ता प्रदीप कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में निगम के डिपो में खड़ी बस को जब्त किया गया।
चार बसों की कुर्की का था आदेश, एक ही मिली
मुआवजा राशि की वसूली के लिए अदालत ने बीएसआरटीसी की चार बसों को जब्त करने का आदेश दिया था। हालांकि, डिपो में कार्रवाई के दौरान केवल एक बस ही मिली। इसके बाद उसे जब्त कर कोर्ट परिसर में लाया गया।
यह मामला सड़क दुर्घटना में विभूति प्रसाद सिंह की मौत से जुड़ा है। हादसे के बाद उनकी पत्नी मुन्नी देवी और तीन बच्चों की ओर से मुआवजे के लिए दावा दायर किया गया था। वर्ष 2023 में दाखिल मामले में वर्ष 2024 में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने बीएसआरटीसी को 93,38,294 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था।
मुआवजे पर 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय
न्यायाधिकरण के आदेश के मुताबिक, निगम को मूल मुआवजा राशि के अलावा 26 मई 2023 से वास्तविक भुगतान होने तक 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना है। निर्धारित राशि का भुगतान नहीं होने पर मृतक की पत्नी और बच्चों की ओर से निष्पादन याचिका दाखिल की गई थी।
इस याचिका में निगम की संपत्तियों को कुर्क कर मुआवजा राशि की वसूली करने की मांग की गई थी। इसी के आधार पर अदालत ने बसों की कुर्की का आदेश जारी किया। शुक्रवार को हुई कार्रवाई में एक बस जब्त की गई, जबकि शेष तीन बसें संबंधित डिपो में नहीं मिलीं।
एकपक्षीय अवार्ड के खिलाफ निगम ने दी थी चुनौती
मुआवजा देने के न्यायाधिकरण के आदेश के बाद बीएसआरटीसी ने एकपक्षीय अवार्ड को वापस लेने के लिए आवेदन दाखिल किया था। हालांकि, न्यायाधिकरण ने निगम के आवेदन को खारिज कर दिया। इसके बाद निगम ने झारखंड हाई कोर्ट में सिविल रिव्यू याचिका दाखिल कर फैसले की समीक्षा की मांग की।
हाई कोर्ट से भी नहीं मिली राहत
झारखंड हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत में हुई। अदालत ने 17 अप्रैल 2026 को निगम की समीक्षा याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि पहले के फैसले में कोई स्पष्ट त्रुटि नहीं है। साथ ही समीक्षा याचिका को न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया।
हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलने और मुआवजे का भुगतान नहीं होने के बाद अब कुर्की की कार्रवाई की गई है। फिलहाल जब्त बस रांची सिविल कोर्ट परिसर में खड़ी है। मुआवजे की मूल राशि और उस पर देय ब्याज का भुगतान होने के बाद ही उसे रिलीज किया जा सकेगा। इस कार्रवाई से दुर्घटना में जान गंवाने वाले व्यक्ति के आश्रितों को न्यायाधिकरण द्वारा निर्धारित मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है।
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