रांची के नर्सिंग होम और क्लीनिकों के लिए नया नियम, रिसेप्शन पर लगानी होगी फीस की सूची
- By rakesh --
- 30 Oct 2026 --
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रांची: राजधानी रांची के सभी नर्सिंग होम, अस्पतालों, क्लीनिकों और अन्य संबंधित चिकित्सा प्रतिष्ठानों को अब मरीजों के लिए जरूरी जानकारियां सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करनी होंगी। सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, रांची के कार्यालय ने इस संबंध में आदेश जारी कर सभी संबंधित संस्थानों को सात दिनों के भीतर निर्देशों का पालन करने को कहा है। अब अस्पतालों को अपना वैध निबंधन प्रमाणपत्र, इलाज और जांच की दरें, डॉक्टरों की शैक्षणिक योग्यता, मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण, विशेषज्ञता और उपलब्ध सुविधाओं का विवरण प्रमुख स्थान पर लगाना होगा।
यह निर्देश 29 अक्टूबर 2026 को जारी कार्यालय आदेश संख्या 5236 के तहत दिया गया है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और मरीजों तथा उनके परिजनों को इलाज से जुड़ी आवश्यक जानकारियां आसानी से उपलब्ध कराना है।
क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट के तहत जारी हुआ आदेश
सिविल सर्जन कार्यालय के अनुसार, सोशल एक्टिविस्ट ज्योति शर्मा की ओर से आधिकारिक ई-मेल के माध्यम से मिले अनुरोध के बाद यह निर्देश जारी किया गया है। अनुरोध में क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट (Clinical Establishments Act-CEA) के प्रावधानों के अनुपालन का मुद्दा उठाया गया था।
इसके बाद जिले में संचालित सभी संबंधित नर्सिंग होम, अस्पतालों, क्लीनिकों और चिकित्सा प्रतिष्ठानों को जरूरी जानकारियां सार्वजनिक करने का आदेश दिया गया। निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि संस्थानों को निर्धारित सूचनाएं प्रदर्शित करने के साथ उनकी व्यवस्था लगातार बनाए रखनी होगी।
रिसेप्शन पर लगाना होगा वैध निबंधन प्रमाणपत्र
आदेश के मुताबिक, प्रत्येक चिकित्सा प्रतिष्ठान को सक्षम प्राधिकार की ओर से जारी वैध और अद्यतन निबंधन प्रमाणपत्र या लाइसेंस ऐसी जगह प्रदर्शित करना होगा, जहां मरीजों और आम लोगों की आसानी से नजर पड़े। इसके लिए रिसेप्शन या संस्थान के किसी अन्य प्रमुख स्थान का इस्तेमाल किया जा सकता है।
इस व्यवस्था से मरीजों और उनके परिजनों को संबंधित अस्पताल या क्लीनिक की वैधानिक स्थिति की जानकारी मिल सकेगी। साथ ही, संस्थान के निबंधन की वैधता को लेकर किसी तरह का भ्रम भी कम होने की उम्मीद है।
डॉक्टरों की फीस से लेकर जांच और बेड चार्ज तक बताना होगा
आदेश का एक अहम हिस्सा चिकित्सा सेवाओं की दरों को सार्वजनिक करना है। सभी संबंधित संस्थानों को अद्यतन और मदवार रेट चार्ट प्रदर्शित करना होगा। इसमें डॉक्टरों की परामर्श फीस, विभिन्न जांचों के शुल्क, चिकित्सा प्रक्रियाओं का खर्च, बेड चार्ज और अन्य लागू सेवा शुल्क का स्पष्ट उल्लेख करना होगा।
दर सूची ऐसी जगह लगानी होगी, जहां मरीज और उनके परिजन उसे आसानी से देख सकें। इससे इलाज शुरू कराने से पहले संभावित खर्च का अनुमान लगाने में सहूलियत मिलेगी। अस्पतालों की ओर से वसूले जाने वाले शुल्क को लेकर होने वाले भ्रम और विवाद की स्थिति भी कम हो सकती है।
हालांकि, आदेश में किसी चिकित्सा सेवा की फीस निर्धारित नहीं की गई है। इसमें केवल संबंधित संस्थानों को अपनी लागू दरों का स्पष्ट और सार्वजनिक प्रदर्शन करने का निर्देश दिया गया है।
डॉक्टरों की योग्यता और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी भी होगी सार्वजनिक
सिविल सर्जन के आदेश के तहत अस्पतालों और क्लीनिकों को वहां कार्यरत डॉक्टरों से संबंधित विवरण भी प्रदर्शित करना होगा। इसमें डॉक्टर का नाम, चिकित्सा संबंधी शैक्षणिक योग्यता, संबंधित मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण का विवरण, विशेषज्ञता और परामर्श या ड्यूटी का समय शामिल होगा।
इससे मरीजों को यह जानने में मदद मिलेगी कि संबंधित संस्थान में कौन-कौन से डॉक्टर उपलब्ध हैं और वे किस क्षेत्र में विशेषज्ञता रखते हैं। मरीज अपनी जरूरत के अनुसार डॉक्टर से परामर्श लेने का समय भी समझ सकेंगे।
इसके अलावा, चिकित्सा प्रतिष्ठानों को वहां उपलब्ध सेवाओं और सुविधाओं की जानकारी भी उचित स्थान पर प्रदर्शित करनी होगी। मरीजों के अधिकारों, शिकायत निवारण की व्यवस्था तथा लागू नियमों और दिशानिर्देशों के तहत जरूरी अन्य सूचनाएं भी सार्वजनिक करनी होंगी। इससे किसी तरह की समस्या होने पर मरीजों और उनके परिजनों को शिकायत दर्ज कराने के उचित माध्यम की जानकारी मिल सकेगी।
सात दिनों में करना होगा अनुपालन, निरीक्षण में होगी जांच
कार्यालय आदेश में सभी संबंधित चिकित्सा प्रतिष्ठानों को निर्देश जारी होने की तारीख से सात दिनों के भीतर इसका अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। यह व्यवस्था केवल एक बार जानकारी प्रदर्शित करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि संस्थानों को इसे लगातार बनाए रखना होगा।
संबंधित निरीक्षण प्राधिकारियों और नामित अधिकारियों को निरीक्षण के दौरान इन निर्देशों के अनुपालन की जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है। यदि किसी अस्पताल या क्लीनिक में निर्देशों के पालन में कमी अथवा नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो इसकी जानकारी सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी को दी जाएगी। इसके बाद लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार उचित कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश की प्रतिलिपि रांची के उपायुक्त को जानकारी के लिए, जिले के संबंधित अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लीनिकों को अनुपालन के लिए तथा निरीक्षण अधिकारियों को निगरानी और सत्यापन के लिए भेजी गई है। सोशल एक्टिविस्ट ज्योति शर्मा को भी उनके आधिकारिक ई-मेल से मिले अनुरोध के संदर्भ में इसकी प्रतिलिपि भेजी गई है।
अब जिले के अस्पतालों और क्लीनिकों को निर्धारित समयसीमा में इन निर्देशों का पालन करना होगा। निरीक्षण के दौरान होने वाली जांच से आदेश के क्रियान्वयन की स्थिति स्पष्ट होगी। यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो मरीजों को इलाज की लागत, डॉक्टरों की योग्यता और उपलब्ध सुविधाओं के बारे में पहले से स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।
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