चुनाव आयोग ने लोकसभा की एक और विधानसभा की सात सीटों पर उपचुनाव टाला
- By admin --
- 24 Jul 2020 --
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आयोग ने सात सितंबर 2020 तक सिर्फ आठ सीटों पर उप चुनाव टालने का निर्णय लिया
झारखण्ड के दुमका और बेरमो के लिए भी होने थे विस उपचुनाव
कोरोना महामारी और कई राज्यों में बाढ़ के हालात को देखते हुए चुनाव आयोग ने लोकसभा की एक और विधानसभा की सात सीटों के लिये होने वाले उप चुनाव को 7 सितंबर 2020 तक टाल दिया है।
आयोग इन उप चुनावों का कार्यक्रम निर्धारित करने पर चर्चा करने के लिये अब शुक्रवार को बैठक करेगा। नियम के मुताबिक, सीट खाली होने के 180 दिन के भीतर चुनाव आयोग को उपचुनाव कराना होता है। इन आठ सीटों के लिए जुलाई, अगस्त और सितंबर की अलग-अलग तारीखों पर 180 छह महीने का समय पूरा हो रहा है।
जिन राज्यों में उप चुनाव टाले गये हैं, उनमें बिहार में वाल्मीकि नगर लोकसभा सीट, तमिलनाडु और, उत्तर प्रदेश में विधानसभा की दो-दो सीटें तथा असम, मध्य प्रदेश और केरल में विधानसभा की एक-एक सीट शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर सीट वहां के मौजूदा प्रतिनिधियों की मृत्यु हो जाने के चलते रिक्त हुई हैं। आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कोविड-19 महामारी और बाढ़ , इस निर्णय के पीछे दो मुख्य कारण हैं।
चुनाव आयोग ने केंद्रीय कानून मंत्रालय से संपर्क किया
अधिकारी ने बताया कि आयोग ने जब स्थिति की समीक्षा की तब पाया कि इन सीटों पर छह महीने की समय सीमा का पालना करना मुश्किल है और उप चुनाव टालने के लिये केंद्रीय कानून मंत्रालय से संपर्क किया। उल्लेखनीय है कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम,1951 के तहत कुछ खास मामलों में, चुनाव आयोग केंद्र सरकार (केंद्रीय कानून मंत्रालय) की सलाह से यह प्रमाणित करता है कि छह महीने की समय सीमा के अंदर उप चुनाव कराना मुश्किल है। चुनाव आयोग ने इस प्रावधान का उपयोग करते हुए इन आठ सीटों पर उप चुनाव टालने के लिये 22 जुलाई को एक प्रमाणपत्र जारी किया।
56 विधानसभा सीटों पर होने वाला है उपचुनाव
आयोग ने एक बयान में गुरुवार को कहा , ‘उप चुनाव के समय आदि का यह विषय भी कल (शुक्रवार) को होने वाले चुनाव आयोग की बैठक के लिये निर्धारित है।’ बयान में कहा गया है कि कुल 56 विधानसभा सीटों और लोकसभा की एक सीट पर उपचुनाव होना है। इनमें उप चुनाव टाल दी गई आठ सीटें भी शामिल हैं। हालांकि, चुनाव आयोग ने कहा कि उसके एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा इन आठ सीटों पर उपचुनाव के बारे में कानून मंत्रालय को लिखे पत्र के कारण कुछ भ्रम की स्थिति बनी है।