रांचीः बालू उठाव पर आरोप-प्रत्यारोप की दौर शुरु,बीजेपी ने घेरा हेमंत सरकार को

एक बार फिर झारखंड में बालू उठाव को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। इस मुद्दे को लेकर बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी के निशाने पर हेमंत सरकार है वहीं सरकार में सहयोगी कांग्रेस ने झारखंड सरकार का बचाव किया है। दोनों ओर से आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो चुका है।

झारखंड में बालू के उठाव और भंडारण को लेकर राजनीति होती रही है, इस मामले को लेकर राज्य  की सरकारें कई बार निशाने पर रही। एक बार फिर बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी ने बालू का मामला उठाकर हेमंत सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की।

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने बालू उठाव पर जो प्रतिबंध लगाया है वो केवल प्रधानमंत्री आवास निर्माण पर ही लागू है, जबकि बालू के बड़े कारोबारी धड़ल्ले से बिहार और बंगाल में बालू का सप्लाई कर रहे हैं।

दरअसल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बालू उठाव को लेकर न्यायालय एनजीटी के आदेश को लागू करने का निर्देश दिया था। मुख्यमंत्री ने कहा था कि खान एवं भूतत्व विभाग सभी जिलों के उपायुक्तों के माध्यम से कोर्ट के आदेश का पालन करें। बालू उठाव पर 10 जून 2020 से 15 अक्टूबर 2020 तक रोक लगाई गई है।

 बहरहाल बाबूलाल मरांडी के आरोप पर हेमंत सरकार में सत्ता की भागीदारी कर रही कांग्रेस ने सरकार के फैसले का बचाव किया है। कांग्रेस के शमशेर आलम ने बीजेपी नेता पर पलटवार किया।बालू उठाव और उसके भंडारण को लेकर पूर्ववर्ती रघुवर सरकार भी निशाने पर रही। उससे पहले हेमंत सरकार बीजेपी के निशाने पर थी।

विपक्ष में रहने वाली पार्टियां आरोप लगाती रही हैं कि सरकार बालू माफिया के इशारे पर काम करती है और उनका हित साधती है। इससे पर्यावरण और नदियों को नुकसान पहुंचता है, लेकिन बालू माफियाओं पर किसी भी सरकार ने नकेल कसने की हिम्मत नहीं दिखाई। आज विपक्ष की भूमिका निभा रही बीजेपी अब हेमंत सरकार को निशाने पर ले रही है।बाबूलाल मरांडी के बयान को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।