नए साल में लोकतंत्र पर भीड़तंत्र हावी, राजनीति तेज, कोन है जिम्मेदार-बड़ा सवाल

रांची। झारखंड में नए साल की शुरूआत में ही लोकतंत्र पर भीड़तंत्र हावी होता नजर आने लगा है। पहले ही हफ्ते में दो मॉब लिंचिंग की घटनाओं ने राज्य के लोगों को सकते में डाल दिया है। पहले सिमडेगा में संजू प्रधान को भीड़तंत्र का शिकार हुआ, वहीं धनबाद में भी एक विक्षिप्त व्यक्ति को भीड़तंत्र ने मारपीट तो की उसके साथ कुछ ऐसा अमानवीय व्यवहार किया गया जो समाज के लिए काला धब्बा बन गया है।

चौकानेवाले तथ्य सामने अभी आना बाकी है। क्योंकि सिमडेगा में संजू प्रधान जिस तरीके से भीड़तंत्र का शिकार हुआ, उसमें कुछ सफेदपोश के नाम भी सामने आ सकते हैं, लेकिन इसके लिए जांच तंत्र को बारीकी से जांच करनी होगी। इसी तरह से अगर धनबाद की घटना की बात की जाए, तो यहां भी समाज के जिम्मेदार लोगों ने ही भीड़तंत्र बनने का काम किय। हालांकि सिमडेगा और धनबाद दोनों घटनाएं अलग-अलग हैं और इसपर एक साथ बातचीत नहीं की जा सकती है। लेकिन दोनों घटनाओं के साथ एक बात साफ है कि भीड़तंत्र कैसे हावी हो रहा है।

अब दोनों मामले जैसे ही समाज के सामने आए, वैसे ही राजनीतिक दल अपने अपने तरीके से सक्रिय होते नजर आ रहे हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर लोकतंत्र पर भीड़तंत्र कैसे हावी होता नजर आ रहा है। इसके लिए कौन कोन लोग जिम्मेदार हैं। क्या इसका समाधान कानूनी रूप से या फिर सामाजिक रूप से किया जा सकता है यह बड़ा सवाल है।