गिरिडीह। फर्जी तरीके से जाति प्रमाण पत्र बनाने के आरोप में जमानत याचिका खारिज
- By admin --
- 15 May 2020 --
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गिरिडीह। गिरिडीह के मेयर सुनील कुमार पासवान की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम ने उनके घर पर छापेमारी की, लेकिन तबतक मेयर अपने घर से फरार हो चुके थे, जिस कारण उनकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी। इधर पुलिस मेयर के परिजनों को नोटिस थमाकर बैरंग वापस लौट आई।
जमानत याचिका खारिज
बताते चलें कि मेयर पर धोखाधड़ी कर फर्जी तरीके से गलत जाति प्रमाण पत्र बनाने का आरोप है। यह मामला गिरिडीह कोर्ट में लंबित था। मेयर सुनील पासवान ने मामले में अग्रिम जमानत के लिए अदालत में अर्जी दायर की थी, जिसे सोमवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंचम अनिल कुमार की अदालत ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई कर खारिज कर दी थी। जमानत याचिका खारिज होते ही अदालत द्वारा उनकी गिरफ्तारी पर लगी रोक स्वतः ही समाप्त हो गई। बताया जाता है कि जिस दिन से जमानत याचिका खारिज हुई है, उसी दिन से मेयर सुनील पासवान घर से गायब है।
जाति प्रमाण पत्र जांच की मांग
बता दें कि अप्रैल 2018 में हुए नगर निगम चुनाव में सुनील कुमार पासवान ने अनुसूचित जाति के प्रमाण पत्र का इस्तेमाल कर आरक्षण का लाभ लिया था। झामुमो जिलाध्यक्ष संजय सिंह ने सुनील पासवान के जाति प्रमाण पत्र को संदिग्ध बताते हुए जांच की मांग की थी। मेयर के जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने पर राज्य के आदिवासी कल्याण आयुक्त के निर्देश पर गिरिडीह के अंचलाधिकारी ने उनके जाति प्रमाणपत्र को रद्द कर मुफस्सिल थाना में मामला दर्ज कराया था।
क्या कहते हैं थानेदार
मुफस्सिल थाना प्रभारी सह मामले के अनुसंधानकर्ता रत्नेश मोहन ठाकुर ने कहा कि गुरुवार को सुनील पासवान की गिरफ्तारी के लिए उनके शीतलपुर स्थित आवास पर छापेमारी की गई थी, लेकिन वे फरार मिले। उनके परिजनों को नोटिस थमा दिया गया है। जल्द ही सुनील पासवान को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।