रांची : आदिवासी समाज भगवान राम के बिना अधूरा है : जगलाल पाहन

राम जन्मभूमि में श्री राम मंदिर निर्माण में योगदान देना झारखंड से पहानों का समूह अयोध्या की ओर प्रस्थान झारखंड से पहानों का जाना आदिवासी समाज के साथ साथ झारखंड के लिए गर्व की बात है़। 

झारखंड के अधिकतर  आदिवासी संगठन अयोध्या नगरी में श्री राम का मंदिर निर्माण के लिए प्रसन्नता जाहिर की है। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी  ने कहा है कि आदिवासी समाज के रग-रग में प्रभु राम बसे है़ं। 14 वर्षों तक राम वनवास में रहे और आदिवासियों के बीच रहे़ राम ने ना तो अयोध्या से सेना लायी थी और ना ही जनकपुरी से, लेकिन आदिवासियों ने राम का साथ दिया़।आदिवासियों के बीच रह कर जीवन यापन किया़।

मंगलवार को राज्य से आदिवासी समाज के परंपरागत पाहनों का दल अयोध्या रवाना हुआ़ था. पाहन बुधु, रवींद्र उरांव, देवी उरांव, राजेंद्र उरांव, सुनील पाहन, अघनु पाहन, विजय उरांव, सका उरांव और भीखा उरांव अयोध्या गये।

पूर्व विधायक गंगोत्री कुजूर ने कहा कि जिस तरह से राम ने रावण का वध कर असत्य पर सत्य की जीत हासिल की थी,उसी प्रकार कुछ मुट्ठी भर लोग सरना समाज को दिग्भ्रमित कर रहे है़ं । प्रभु राम से आदिवासी समाज को अलग करने वालों की हार हुई है़ वहीं मूल सरना आदिवासी समाज की जीत हुई है़।

मेयर आशा लकड़ा ने कहा कि अयोध्या में श्री राम मंदिर भूमि पूजन कार्यक्रम में झारखंड के प्रमुख पाहन शामिल हुए, यह हमारे लिए गर्व की बात है़ राज्य के हर जिले में भूमि पूजन दिवस को राम उत्सव के रूप में मनाने की तैयारी की जा रही है़ इतिहास गवाह है, झारखंड के कण-कण में प्रभु श्री राम का वास है़ ।

पूर्व विधायक रामकुमार पाहन ने कहा कि आदिवासी समाज और भगवान राम एक दूसरे के पूरक है़ं दोनों को कोई भी अलग नहीं कर सकता़

पाहनों के अयोध्या जाने से पूरे झारखंड के आदिवासी समाज अत्यंत प्रसन्न है़। पांच अगस्त को सभी आदिवासी समाज के लोग अपने अपने घर के बाहर दिया जलाने की तैयारी कर रहे है़ं।

बीजेपी महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष आरती कुजूर  ने  इस उत्सव को आदिवासी समाज का दर्पण का दिन बताया है। सदियों से राम का संबंध रहा है़ उनकी सांस्कृतिक विरासत को कोई भी तोड़ने की कोशिश ना करे़।

आदिवासी समाज बहुत ही संयमित है,उनकी सांस्कृतिक विरासत को कोई छेड़ने की कोशिश न करे, नहीं तो इसका परिणाम उलगुलान और हूल क्रांति जैसा होगा़ मुख्य पाहन आदिवासी समाज भगवान राम के बिना अधूरे हैं, हम अपने पूजा-पाठ में अराध्य देव के रूप में सिंगबोंगा, मरंगबुरु के साथ साथ भगवान राम को याद करते है़ं।