नई दिल्ली: श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश की नई व्यवस्था लागू करें : सुप्रीम कोर्ट

जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने शुक्रवार काे ई-सुनवाई में देवघर स्थित बाबा वैद्यनाथ धाम मंदिर और बासुकीनाथ मंदिर के मामले में कहा कि ई-दर्शन काेई देव दर्शन नहीं हाेते। राज्य सरकार केंद्र की गाइडलाइन का पालन करते हुए मंदिर में सीमित संख्या में श्रद्धालुओं काे जाने दे। सरकार झारखंड और बाहर के लाेगाें काे श्रावण पूर्णिमा और भादाे में दर्शन करने की व्यवस्था करे।

राज्य सरकार चाहे ताे ई-पास के जरिए राेजाना 300 लाेगाें काे दर्शन करने की अनुमति दे। यह याचिका भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने दायर की थी। कहा था कि इन मंदिराें में श्रावण और भादाे में पूजा-अर्चना करने से लाेगाें की इच्छाएं पूरी हाेती हैं। इसलिए श्रद्धालुओं काे मंदिर में जाने की अनुमति दी जाए। पहले यह मामला हाईकाेर्ट में गया था। हाईकाेर्ट ने तीन जुलाई काे केवल ई-दर्शन की अनुमति दी थी।

सरकार का तर्क था- अनुमति दी तो खतरा बढ़ेगा

जस्टिस मिश्रा ने कहा कि कोरोना में जब पूरा देश खुल रहा है तो धार्मिक स्थल क्यों बंद हैं? महत्वपूर्ण दिनों में उन्हें क्यों नहीं खुलना चाहिए? राज्य सरकार ने इस पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि श्रद्धालुओं को मंदिर में पूजा की अनुमति दी तो अव्यवस्था फैल जाएगी। कोरोना का खतरा बढ़ जाएगा। श्रद्धालुओं को नियंत्रित करना मुश्किल होगा।

इसलिए अनुमति नहीं दी जा सकती। जस्टिस मिश्रा ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि बैद्यनाथ धाम मंदिर में सीमित श्रद्धालुओं को जाने की अनुमति दी जा सकती है। राज्य सरकार ऐसी व्यवस्था बनाए, जिससे श्रद्धालु बिना जोखिम मंदिर में दर्शन कर सकें। इस पर राज्य सरकार अपना पक्ष रखते हुए कहा कि ई-दर्शन की सुविधा दी है। इससे बिना कोरोना दर्शन हो सकते हैं।

जस्टिस मिश्रा ने कहा कि झारखंड सरकार पूर्णमासी और भादो में श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश की नई व्यवस्था लागू करे। राज्य सरकार चाहे तो ई-टोकन व्यवस्था भी लागू कर सकती है।

 आदेश मिलने पर कार्रवाई की जाएगी: झारखंड सरकार

राज्य सरकार ने कहा- सुप्रीम काेर्ट का आदेश नहीं मिला है। आदेश मिलने पर उसके अनुरूप ही कार्रवाई की जाएगी।