झारखंड के स्कूलों में बदल सकती है पढ़ाई की व्यवस्था, 12वीं से पहले अंग्रेजी बोलना सीखेंगे छात्र
- By rakesh --
- 04 Nov 2026 --
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रांची: झारखंड के स्कूलों में भाषा शिक्षा को लेकर नई नीति तैयार की जा रही है। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि राज्य की भाषाई, सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक और दूरदर्शी शिक्षा नीति बनाई जाए। इसमें विद्यार्थियों की मातृभाषा को प्राथमिकता देने के साथ हिंदी और अंग्रेजी के ज्ञान, कौशल विकास तथा डिजिटल दक्षता पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा कराना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए सक्षम, आत्मविश्वासी और प्रतिस्पर्धी बनाना भी होना चाहिए।
मुख्यमंत्री बुधवार को झारखंड मंत्रालय में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की ओर से प्रस्तुत ‘झारखंड राज्य भाषा शिक्षा नीति’ के प्रारूप पर आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को नीति के विभिन्न पहलुओं पर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
मातृभाषा में पढ़ाई से बच्चों की समझ होगी मजबूत
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में भाषाई और सांस्कृतिक विविधता राज्य की समृद्ध पहचान है। यहां के बच्चे घर और अपने समुदाय में मातृभाषा तथा स्थानीय भाषाओं का इस्तेमाल करते हैं, जबकि स्कूलों में पढ़ाई मुख्य रूप से हिंदी या अंग्रेजी माध्यम से होती है। भाषाओं के इस अंतर का असर बच्चों की समझ, अभिव्यक्ति, कक्षा में सहभागिता और सीखने की गति पर नहीं पड़ना चाहिए।
उन्होंने निर्देश दिया कि ऐसी शिक्षा पद्धति विकसित की जाए, जिसमें विद्यार्थी अपनी मातृभाषा में सहजता से सीख सकें। इसके साथ ही हिंदी और अंग्रेजी का ज्ञान भी उन्हें बेहतर तरीके से मिले। मुख्यमंत्री के अनुसार, स्थानीय भाषाओं को शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने से बच्चों की सीखने की क्षमता मजबूत होगी और शिक्षा के क्षेत्र में नए प्रयोगों का रास्ता खुलेगा।
12वीं से पहले अंग्रेजी स्पोकन की कक्षाएं होंगी
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने विद्यार्थियों के लिए अंग्रेजी स्पोकन की कक्षाएं संचालित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं और खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए विद्यार्थियों को देश के अलग-अलग राज्यों में जाना पड़ता है। ऐसे में अंग्रेजी बोलने और संवाद करने का आत्मविश्वास उनके लिए काफी उपयोगी होगा।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विद्यार्थियों के 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने से पहले ही अंग्रेजी स्पोकन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इससे बच्चे आगे की पढ़ाई, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर तरीके से अपनी बात रख सकेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाषा संबंधी दक्षता विद्यार्थियों के लिए नए अवसरों के द्वार खोल सकती है।
हॉकी समेत कौशल आधारित शिक्षा पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों की रुचि, प्रतिभा और व्यावहारिक कौशल को विकसित करना भी जरूरी है। शिक्षा नीति में कौशल आधारित शिक्षा को पर्याप्त महत्व दिया जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थी किताबी ज्ञान के साथ अपनी प्रतिभा को भी निखार सकें।
उन्होंने कौशल आधारित शिक्षा के तहत हॉकी को शामिल करने पर विचार करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के बच्चे और बच्चियां हॉकी के क्षेत्र में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था के माध्यम से उन्हें अपनी खेल प्रतिभा विकसित करने और आगे बढ़ने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
डिजिटल दक्षता और बहुभाषिक शिक्षा होगी नीति का आधार
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को डिजिटल रूप से दक्ष बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा नीति तैयार करते समय वर्तमान जरूरतों के साथ भविष्य की चुनौतियों को भी ध्यान में रखना होगा। स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी तक में डिजिटल दक्षता महत्वपूर्ण है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मातृभाषा, हिंदी और अंग्रेजी को एक-दूसरे का सहयोगी भाषा समूह मानकर नीति तैयार की जाए। इसके लिए संवर्धनात्मक बहुभाषिकता का सिद्धांत अपनाने पर बल दिया गया। इस व्यवस्था के तहत पहली भाषा को हटाए बिना दूसरी और तीसरी भाषा को जोड़ा जाएगा, ताकि विद्यार्थी अपनी मातृभाषा के साथ अन्य भाषाओं में भी दक्षता हासिल कर सकें।
तीन शैक्षणिक चरणों में लागू करने का प्रस्ताव
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि झारखंड राज्य भाषा शिक्षा नीति तैयार करने के लिए वर्ष 2025 में भाषा शिक्षा नीति निर्माण समिति गठित की गई थी। समिति ने झारखंड के अलावा दूसरे राज्यों की शिक्षा पद्धतियों का अध्ययन करने के बाद नीति का प्रारूप तैयार किया है।
प्रस्तावित प्रारूप में तीन प्रमुख शैक्षणिक चरण निर्धारित किए गए हैं। पहले चरण में पूर्व बाल्यावस्था शिक्षा से कक्षा दो तक, दूसरे चरण में कक्षा तीन से पांच तक और तीसरे चरण में कक्षा छह से 12वीं तक की पढ़ाई को शामिल किया गया है। तीनों चरणों में मातृभाषा और स्थानीय भाषाओं को स्कूली शिक्षा से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
अधिकारियों के अनुसार, नई नीति से झारखंड की स्थानीय भाषाओं का संरक्षण और संवर्धन होगा। साथ ही, स्कूलों में स्थानीय भाषाओं के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और बच्चों के लिए सीखने की प्रक्रिया अधिक सहज एवं प्रभावी बन सकेगी।
बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
झारखंड राज्य भाषा शिक्षा नीति के प्रारूप पर हुई बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह, झारखंड शिक्षा परियोजना के राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन, टीआरआई के निदेशक आलोक शिकारी कच्छप और जैक के सचिव एसडी तिग्गा सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में नीति के विभिन्न प्रावधानों और प्रारूप के बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
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