रामगढ़ उपचुनाव :  आजसू प्रत्याशी सुनीता की जीत, बनेंगे कई नए समीकरण !

एनडीए व यूपीए के लिए बना लिटमस टेस्ट !

रांची। झारखंड के रामगढ़ विधानसभा के उपचुनाव में एनडीए की प्रत्याशी सुनीता चौधरी ने जीत हांसिल कर कई नए समीकरणों पर राजनीतिक लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। माना जा रहा है कि यह चुनाव एनडीए और यूपीए दोनों के लिए एक तरह का लिटमस टेस्ट साबित होगा। गिरिडीह सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी की पत्नी सुनीता चौधरी ने हाल में ही सजा पाने के बाद कांग्रेस की विधायक ममता देवी के पति बजरंग महतो को 22 हजार से अधिक मतों से हरा दिया।

 

वर्ष 2024 के लोकसभा और झारखंड विधानसभा के चुनाव के ठीक पहले हुए इस उपचुनाव ने झारखंड के राजनीतिक दलों को एक बार नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है। दरअसल आजसू पार्टी की तरफ से एनडीए प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतनेवाली सुनीता चौधरी की जीत से जहां भारतीय जनता पार्टी को मजबूती मिली है। वहीं यूपीए के लिए कई नई चुनौतियां सामने दिखाई पड़ सकती है।

वर्ष 2019 के चुनाव झारखंड विधानसभा के चुनाव में बीजेपी और आजसू के अलग—अलग होकर चुनाव लड़ने का खामियाजा भी भुगतना पड़ा था। अब इस जीत के साथ ही इस बात को लेकर बीजेपी और आजसू को इस बात पर गहन मंथन करने की जरुरत पड़ सकती है कि आखिर 81 में से कितने सीट पर बीजेपी और कितने सीट पर आजसू विधानसभा के चुनाव लड़ेगी।

इधर यूपीए की बात की जाए तो कांग्रेस के प्रत्याशी बजरंग महतो की हार से सत्ताधारी दलों में खलबली मचने लगी है। सरकार चला रही पार्टी जेएमएम के नेताओं ने विजयी प्रत्याशी को बधाई तो दे दी है, लेकिन अब इस बात पर गौर करने की जरुरत पड़ सकती है कि आखिर आनेवाले समय में किस तरह से रणनीति बनाई जाए।

राजनीति के जानकारों का मानना है कि राज्य में हेमंत सरकार के तीन साल के दौरान जिन मुद्दों पर सरकार को कार्य करने जरुरत थी, शायद उसपर अमल नहीं किया जा सका है।चाहे स्थानीय नीति और व नियोजन नीति को परिभाषित करने की बात हो या भी भ्रष्टाचार को लेकर उठाए जा रहे सवालष सभी पर आम जनता की नजर बनी हुई थी और जनादेश इसी के आधार पर तय होता नजर आया।