मोदी ने किया कृषि कानून वापस का एलान- पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त !

कृषि कानून वापस लेने का फैसला, राजनीति हुई तेज

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरफ से गुरु पूर्णिमा के दिन जब देश में लागू तीन कृषि कानून को वापस लेने की घोषणा की गई तो देश की राजनीति में अलग-ललग तरह की चर्चा तेज हो गई। केंद्र की सरकार में शामिल दल के नेताओं ने इस फैसले पर मोदी सरकार की लचीलेपन नीति को सामने रखते हुए इस बात का जिक्र किया है बीजेपी की सरकार जनहित का हमेशा ध्यान रखती है और इसी को ध्यान में रखते हुए इस तरह का फैसला लिया गया है।

वहीं विपक्ष में बैठी कांग्रेस के साथ साथ तमाम विपक्षी दल के नेताओं ने मोदी को झुकाने का दावा करने लगी है। हालांकि किसान इस फैसले से काफी खुश हैं और शायद आम किसानों को इस फैसले से आनेवाले समय में लाभ दिखाई दे रहा है।

हालांकि किसानों के संयुक्त मोर्चा ने तय किया है मोदी सरकार के इस फैसले के बाद सामूहिक रूप से बैठक कर तय करेंगे कि आखिर आगे की रणनीति क्या है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस फैसले का तमाम किसान मोर्चा की तरफ से स्वागत तो जरुर किया जा रहा है, लेकिन इस बात की रणनीति बनाई जा रही है कि इन तीन कृषि कानून को वापस लेने के के बाद किसानों का क्या फायदा होगा। माना जा रहा है कि किसानों के नेताओं की तरफ से अब और भी कुछ मांगों को सामने रखने की पहल की जा सकती है।

इसमें सबसे महत्वपूर्ण होगा की किसानों को सरकार की तरफ से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर क्या रूख होगा, इसका खुलासा करना हो सकता है। इसके अलावा भविष्य में सरकार किसी तरह कृषि कानूनों को लागू करने के पहले किस तरीके से वार्ता की जा सकती है, इसपर भी चर्चा हो सकती है।

हालांकि इस मामले में अब एक सुखद पहलू यह भी हो सकता है कि केंद्र की सरकार और किसान नेताओं के साथ भविष्य में भी मुद्दों पर वार्ता का दरवाजा खुल सकेगा। जो शायद देशहित के लिए एक बड़ा कदम हो सकता है। क्योंकि किसानों के मुद्दे पर एक मंच पर सरकार और किसानों के बीच वार्ता होना आसान नहीं था, लेकिन अब इसपर गौर किया जा सकता है।