रामगढ़ उपचुनाव के बाद आजसू पार्टी कई सीटों पर लड़ने को तैयार !
- By rakesh --
- 18 Apr 2023 --
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आजसू प्रमुख सुदेश कुमार महतो की अध्यक्षता में पार्टी की बैठक कल रांची में
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सभी विधानसभा प्रभारी रहेंगे मौजूद
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भावी कार्यक्रमों एवं राज्य के ज्वलंत विषयों पर होगी चर्चा
रांची। झारखंड के रामगढ़ विधानसभा उपचुनाव में आजसू प्रत्याशी की जीत के बाद पार्टी अब राज्य के कई सीटों पर अपनी नजर बना रही है। पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस बार के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की तरफ से भी आजसू पार्टी को ज्यादा सीटें दी जाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए चुनावी समीकरणों पर काम किया जा रहा है।
हालांकि पिछले चुनाव के ठीक पहले आजसू पार्टी ने चुल्हा प्रमुख की एक विशेष योजना के तहत राज्य के 81 में से 19 सीटों पर प्रत्याशी उतारने की कोशिश की थी। लेकिन बीजेपी के साथ सभी सीटों पर तालमेल नहीं हो पाने के कारण एनडीए को नुकसान उठाना पड़ा और राज्य में हेमंत सोरेन की सरकार बन गई। इस बार के चुनाव में एनडीए गठबंधन इस बात पर गौर कर रहा है कि किस तरीके से दोनों पार्टी मजबूती से चुनाव लड़े, जिससे एनडीए एक बार सत्ता पर काबिज हो सके।
इन सारी बारीकियों को देखते हुए आजसू प्रमुख सुदेश कुमार महतो की अध्यक्षता में 19 अप्रैल को हरमू, रांची स्थित केंद्रीय कार्यालय में आजसू पार्टी की बैठक आयोजित की गई है। बैठक में सभी विधानसभा प्रभारी मौजूद रहेंगे।
बैठक की जानकारी देते हुए आजसू पार्टी के केंद्रीय मुख्य प्रवक्ता डॉ. देवशरण भगत ने कहा कि पार्टी अप्रैल माह को सामाजिक न्याय महीना के रुप में मना रही है। इस दौरान राज्य भर में कई कार्यक्रम किया जाना है और कई कार्यक्रम किए भी गए हैं, जिसमें 13 अप्रैल को राज्य के सभी 24 जिलों में आयोजित जिलास्तरीय न्याय मार्च भी शामिल है। साथ ही राज्यस्तरीय सामाजिक न्याय मार्च सहित कई अन्य राज्यव्यापी कार्यक्रम होना भी सुनिश्चित है। इन सभी भावी कार्यक्रमों तथा राज्य के ज्वलंत विषयों को लेकर कल बैठक आयोजित की गई है।
इन सात सूत्री मांगों को लेकर आजसू पार्टी का संघर्ष जारी रहेगा-
ज्ञात हो कि आजसू पार्टी अपनी सात सूत्री मांगों को लेकर लगातार संघर्ष कर रही है तथा सड़क से लेकर सदन तक इन विषयों को लेकर मुखर रही है। विगत 13 अप्रैल को न्याय मार्च के जरिए सभी जिलों में इन मुद्दों को लेकर कार्यकर्ताओं ने उपायुक्त कार्यालय भी कूच किया। सात सूत्री मांगों में खतियान आधारित स्थानीय एवं नियोजन नीति, जातीय जनगणना एवं पिछड़ों को आबादी अनुसार आरक्षण, पूर्व में जो जातियां अनुसूचित जनजाति की सूची में थे, उन्हें पुनः अनुसूचित जनजाति में शामिल करने, सरना धर्म कोड लागू करने, बेरोजगारों को रोज़गार, झारखण्ड के संसाधनों की लूट बंद करने तथा झारखण्ड आंदोलनकारियों को सम्मान की बात मुख्य रूप से शामिल है।