दूसरे का नुकसान करना सिद्धान्त के विपरीत है- स्वामी मुकुंदानंद

दूसरे का नुकसान करना सिद्धान्त के विपरीत है- स्वामी मुकुंदानंद

दो दिवसीय कार्यक्रम में आध्यात्मिक साधना के द्वारा जीवन में परिवर्तन रहस्य को बताएंगे

21 फरवरी को संध्या 5:30 से रात्रि 8:00 बजे तक अशोकनगर देवालय एवं चिंतनस्थली के सभागार में देगे आध्यात्मिक प्रवचन

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जगद्गुरुकृपालु योग यानि जे.के.योग इंडिया व अशोक नगर देवालय एवं चिंतन स्थल समिति, राँची के संयुक्त प्रयास से दो दिवसीय भव्य आध्यात्मिक कार्यक्रम देवालय मंदिर (अशोक नगर रोड नंबर 2 ) के सभागर में सायं 5 बजे प्रारंभ हुआ।
इस अवसर पर पूज्यनीय स्वामी श्री मुकुंदानंद जी महाराज के श्री मुख से संतो की प्रेरणादायक प्रसंग के माध्यम से आध्यात्मिक साधना के रहस्य जानने का स्वर्णिम अवसर उपस्तिथ श्रोताओ को प्राप्त हुआ।
जैसा कि हम सभी जानते है कि स्वामी मुकुंदानंद जी महाराज विश्वप्रसिद्ध आध्यात्मिक शिक्षक, मन-प्रबंधन के विशेषज्ञ तथा आई आई टी एवं आई आई एम जैसी प्रतिष्ठित संस्थानों के छात्र भी रहे हैं ।
सभागार में स्वामी जी ने अपने द्वारा लिखी दो पुस्तक का विमोचन किया। इस अवसर पर
उन्होंने अपने द्वारा रचित पुस्तकों पर हस्ताक्षर भी किये।
इस अवसर पर स्वामी जी का सभागार में अभिनंदन,स्वागत भी किया गया।
सायं 6 बजे प्रवचन के द्वारा आध्यात्मिक साधना संबंधित चिंताओ का समाधान करेंगे एवं जीवन परिवर्तन से संबंधित दिब्य चर्चाओं पर अपनी बात रखी।
स्वामीजी ने आध्यात्मिक प्रवचन के दौरान आत्मा, भगवान, माया , ज्ञान इत्यादि विषयों पर चर्चा करते हुए कहा शास्त्र कहते है जो सत्य ज्ञान है उसको सुनो ओर जो सुना उसपर विचार, चिंतन, मंथन करो वही काम आएगा।
जब हमारे अंदर क्रोध का वास होता है तो ज्ञान निकल जाता है। ज्ञान और अज्ञान पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा जहाँ मनुष्य ज्ञान को भूलता है वो पशु जैसा हो जाता है।
भगवान के मिलने पर चर्चा करते हुए बताया कि वेद कह रहा है आप जहाँ जहाँ जायेगे वहाँ वहाँ भगवान विराजमान है भगवान हमारे अंदर ही निवास कर रहे है क्योंकि वो सारे संसार मे सर्वत्र है जिसे हम बाहर खोज रहे है वो हमारे अंदर बैठा है क्योंकि भगवान नित्य निरंतर प्राप्त है।
अगर हमारे अंदर माया का वास है तो हमे भगवान नही मिल रहे। अज्ञान को मिटाने के लिए हमारे शास्त्र है अगर हमारे अंदर क्रोध, लोभ, अज्ञान का वास है तो समझे हमे ज्ञान प्राप्त नही हुआ है।
मनुष्य के जीवन में कई प्रश्न होते हैं। सांसारिक प्रश्नों के उत्तर के लिए हम अपने माता पिता गुरु जनों की सहायता लेते है।
कर्म, ज्ञान, भक्ति मार्ग सर्वश्रेस्ठ
इस अवसर पर स्वामी जी ने भजो मुरली मनोहर नंदलाला भजनों से स्थल को भक्तिमय बना दिया।
तेरी कृपा का भरोसा माहरी राधा रानी भजनों से भक्तिमय, संगीतमय बना स्थल ।
करुणामयी राधा रानी की जय वृंदावन बिहारी लाल की जय जयकारो से गुंजा।

इस अवसर पर मुकेश कुमार, बी बी मिश्रा, प्रेमचंद श्रीवास्तव, प्रमोद सारस्वत सहित काफी लोगो ने स्वामी जी से आर्शीवाद लिया।
इसके पूर्व दोपहर 1 बजे एयरपोर्ट पर स्वामी जी का स्वागत , अभिनंदन किया गया
आयोजन समिति ने सभी धर्मप्रेमियों से 21 फरवरी को सायं 5 बजे से स्वामी जी के श्रीमुख से प्रेरणादायक प्रसंग के माध्यम से आध्यात्मिक कार्यक्रम का लाभ लेने का आग्रह किया है।
आरती के साथ आज का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ ।काफी संख्या में लोगो ने स्वामी जी से आशीर्वाद प्राप्त किया।