भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ, झारखंड पर भी इसका असर !

अमेरिका की तरफ से भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बाद झारखंड पर भी इसका असर दिखाई पड़ने लगा है। राज्य से टैक्सटाइल्स उद्योगों को इस टैरिफ का झटका दिखाई पड़ा है। राज्य की राजधानी रांची की ओरिएंट क्राफ्ट जैसी फैक्ट्रियों के ऑर्डर 80% तक रद्द हो चुके हैं। हजारों कारीगरों और खासकर महिलाओं के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। झारकंड के कई जिलों को तसर सिल्क और हैंडलूम का गढ़ माना जाता है। हजारीबाग, गोड्डा, दुमका, सरायकेला-खरसावां और साहिबगंज जैसे जिलों में हजारों परिवार पीढ़ियों से बुनाई और सिल्क उत्पादन में लगे हुए हैं। इन उत्पादों की सबसे बड़ी मांग विदेशों में रही है, खासकर अमेरिका और यूरोप में।

लेकिन अब हालात अचानक बदल गए हैं। अमेरिका ने आयातित टेक्सटाइल और हैंडलूम उत्पादों पर 50% टैरिफ लगा दिया है। इसका सीधा असर झारखंड की कंपनियों और यहां काम करने वाले कारीगरों पर पड़ा है। रांची स्थित ओरिएंट क्राफ्ट की फैक्ट्री इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। यहां जे क्रू, पोलो और डिक्स जैसी अमेरिकी कंपनियों के लिए गारमेंट तैयार किए जाते थे। लेकिन जैसे ही टैरिफ बढ़ा, कंपनी के 80% ऑर्डर रद्द हो गए।

फैक्ट्री के अधिकारी बताते हैं कि हर साल 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का निर्यात केवल अमेरिका को होता था। लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि उत्पादन ठप होने की कगार पर है। इस फैक्ट्री में करीब 3000 कर्मचारी काम करते हैं, जिनमें 90% महिलाएं हैं। कंपनी घरेलू बाजार तलाश रही है, लेकिन अगर मांग नहीं मिली तो छंटनी करनी ही पड़ेगी।झारखंड का टेक्सटाइल और सिल्क उद्योग न सिर्फ राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, बल्कि ग्रामीण आजीविका का भी मुख्य सहारा है। करीब 3 लाख लोग सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से इससे जुड़े हैं। इनमें बड़ी संख्या महिलाओं की है, जो कताई, बुनाई, सिलाई और कढ़ाई में अपनी मेहनत झोंकती हैं। टैरिफ के झटके से अब इन सबकी रोजी-रोटी पर संकट गहराने लगा है।