रांची। मोपेड से हवाई जहाज तक का सफर…. सजल चक्रवर्ती

रांची : झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव और चारा घोटाला के आरोपी सजल चक्रवर्ती का बेंगलुरु में निधन हो गया। गुरुवार (5 नवंबर, 2020) को उन्होंने बेंगलुरु के नारायण हृदयालय सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में आखिरी सांस ली। दिल के सफल ऑपरेशन के बाद उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उनका निधन हो गया। शुक्रवार को रांची के घाघरा में उनका अंतिम संस्कार किया जायेगा। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी एवं अर्जुन मुंडा समेत तमाम दलों के राजनेताओं ने उनके निधन पर शोक जताया है।

सचिव सजल चक्रवर्ती का शुक्रवार (6 नवंबर, 2020) को रांची के घाघरा में अंतिम संस्कार किया जायेगा। उनका अंतिम संस्कार उसी जगह होगा, जहां उनके प्रिय बंदर भोलू और बंदरिया शिल्पी को दफनाया गया था। हाल ही में शिल्पी और भोलू दोनों की मौत हो गयी थी। दोनों को घाघरा में दफन किया गया था। सजल चक्रवर्ती ने अपने करीबी लोगों से कहा था कि उनका अंतिम संस्कार इन्हीं दोनों के पास किया जाये।

भारतीय प्रशासनिक सेवा (आइएएस) के अधिकारी सजल चक्रवर्ती रांची के उपायुक्त एवं झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव भी रहे। झारखंड के बेहद चर्चित और मिलनसार आइएएस अधिकारी सजल चक्रवर्ती संयुक्त बिहार के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बेहद करीबी थे। चारा घोटाला मामला में सजल को भी 5 साल की सजा हुई थी।

संयुक्त बिहार के दौरान सजल चक्रवर्ती 1992 से 1995 के बीच चाईबासा के उपायुक्त थे और इसी दौरान पशुपालन विभाग में गड़बड़ी करने वालों से लैपटॉप लेने का आरोप उन पर लगा था। चारा घोटाला मामले में कोर्ट ने सजा सुनायी, तो सजल चक्रवर्ती को सस्पेंड कर दिया गया। हालांकि, बाद में वह झारखंड के मुख्य सचिव भी बने। इस वक्त सजल चक्रवर्ती जमानत पर चल रहे थे।बेबाक अंदाज के लिए वह हमेशा चर्चा में रहते थे।

झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव सजल चक्रवर्ती को जीव-जंतुओं से बहुत प्यार था. उन्होंने कुत्ते, बिल्ली और बहुत सारे बंदर पाल रखे थे. बंदर से उन्हें खास लगाव था. हाल ही में उनके प्रिय बंदर भोलू और बंदरिया शिल्पी की मौत हो गयी. दोनों रांची के घाघरा में दफन किया गया. सजल ने अपने करीबी लोगों से कहा था कि जब वह मरेंगे, तो उनका अंतिम संस्कार इनके बगल में ही किया जाये।

अब जबकि सजल चक्रवर्ती इस दुनिया में नहीं हैं, उनकी इच्छा के अनुरूप उनका अंतिम संस्कार घाघरा में उसी जगह किया जायेगा, जहां उनके प्रिय बंदर-बंदरिया भोलू और शिल्पी को दफन किया गया था। सजल चक्रवर्ती जब भी फुर्सत में रहते थे, भोलू और शिल्पी को अपने साथ रखते थे। बंदर-बंदरिया दोनों सजल के दोनों कंधे पर बैठे रहते थे।