2 घंटे की जोरदार डिबेट.. फिर आधी रात को लोकसभा में यूं पास हुआ वक्फ बिल !

2 घंटे की जोरदार डिबेट.. तीखी तकरीरें.. फिर आधी रात को लोकसभा में यूं पास हुआ वक्फ बिल

लोकसभा ने बुधवार को 12 घंटे की तीखी बहस के बाद वक्फ (संशोधन) बिल पास कर दिया. बिल को 288 वोटों के समर्थन और 232 विरोध के साथ मंजूरी मिली. बीजेपी की सहयोगी पार्टियों के समर्थन से यह संख्या बहुमत के आंकड़े से आगे निकल गई. इस दौरान सरकार ने विपक्ष के उन आरोपों का जोरदार जवाब दिया, जिसमें कहा गया था कि यह बिल संविधान और मुस्लिम अधिकारों का उल्लंघन करता है और संघीय ढांचे पर हमला करता है.

मुख्य सहयोगी पार्टियों का मिला साथ
बीजेपी को अपनी प्रमुख सहयोगी पार्टियों तेदेपा (TDP), जदयू (JDU), शिवसेना और लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) का समर्थन मिला, जबकि INDIA गठबंधन ने इस विधेयक के विरोध में एकजुटता दिखाई. हालांकि भाजपा को पहले से ही यकीन था कि वह इस बिल को पास करवाने में कामयाब हो जाएगी. इसी यकीन के साथ गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा,’आपने ये बदलाव सिर्फ अपने वोट बैंक को बचाने के लिए किए थे और हमने इसे खत्म करने का फैसला किया है.’

आज राज्यसभा पर सभी की नजरें
अब यह बिल गुरुवार को यानी आज राज्यसभा में रखा जाएगा, यहां भी इसके पास होने की पूरी संभावना है. लोकसभा में इस मुद्दे पर बहस में धर्मनिरपेक्ष बनाम सांप्रदायिक बहस देखने को मिली लेकिन बिल का पास होना एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ. इससे पहले नागरिकता (संशोधन) कानून (CAA), तीन तलाक पर रोक और उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने जैसे कानूनों के बाद, यह चौथा बड़ा कदम था, जिसे भाजपा सरकार ने मुस्लिम संगठनों और विपक्षी पार्टियों के विरोध के बावजूद लागू किया.

बिल पास होना भाजपा के लिए बड़ी जीत क्यों?
बीजेपी के लिए यह जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि उसे अपने दम पर लोकसभा में बहुमत हासिल नहीं था. इसके बावजूद उसके धर्मनिरपेक्ष सहयोगी दलों ने इस विधेयक का समर्थन किया. इससे यह इशारा मिलता है कि इन पार्टियों को भरोसा है कि मुसलमानों का समर्थन खोने से उन्हें कोई बड़ा नुकसान नहीं होगा, बल्कि बीजेपी के साथ गठबंधन से उन्हें ज्यादा फायदा होगा.

लोकसभा में गरमागरम बहस
लोकसभा में बहस के दौरान कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि यह विधेयक संविधान के मूल ढांचे पर हमला है और इससे अल्पसंख्यकों को बदनाम कर उनका हक छीना जा रहा है और समाज में फूट डाली जा रही है. इसका जवाब देते हुए अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने साफ किया कि बिल का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है. यह सिर्फ संपत्तियों से जुड़ा हुआ कानून है. उन्होंने कहा,’सरकार किसी भी धार्मिक संस्था के मामलों में दखल नहीं कर रही है. यूपीए सरकार ने वक्फ कानून में कुछ बदलाव किए थे, जिससे इसे अन्य कानूनों पर प्राथमिकता मिल गई थी. इसलिए यह जरूरी था कि इसमें संशोधन किया जाए.’