Hindi Diwas 2026: एटीआई में हिंदी दिवस पर कार्यक्रम, प्रवीण टोप्पो बोले- सरल भाषा से मजबूत होगा सुशासन
- By rakesh --
- 14 Sep 2026 --
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रांची: हिंदी दिवस के अवसर पर कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग, झारखंड सरकार की ओर से एटीआई सभागार में व्याख्यान एवं काव्यपाठ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अधिकारियों, साहित्यकारों और विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान हिंदी की भूमिका, प्रशासन में सरल भाषा के इस्तेमाल और सुशासन में पारदर्शिता जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
विभागीय सचिव प्रवीण टोप्पो ने कहा कि आम नागरिक तक सरकारी योजनाओं और सेवाओं की जानकारी प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए प्रशासनिक भाषा सरल और सहज होना जरूरी है।
सरल हिंदी और आसान प्रक्रिया पर जोर
प्रवीण टोप्पो ने कहा कि सुशासन की पहचान केवल नीतियों से नहीं, बल्कि उस व्यवस्था से होती है जिसे आम लोग आसानी से समझ और इस्तेमाल कर सकें। उन्होंने कार्यालयों में अनावश्यक कठिन शब्दावली और जटिल प्रक्रियाओं को कम करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि जब सरकारी भाषा आमजन की समझ में आती है, तो योजनाओं और सेवाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाना आसान होता है। अधिकारियों और कर्मचारियों को जनहित को प्राथमिकता देते हुए स्पष्ट और सरल कार्यशैली अपनाने की जरूरत है।
सचिव ने प्रशासनिक कामकाज में नागरिकों की सुविधा को केंद्र में रखने की अपील भी की।
तकनीक से बढ़ रही पारदर्शिता
कार्यक्रम के दौरान सचिव ने प्रशासन में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन सेवाओं, समयबद्ध कार्य निष्पादन और शिकायतों की निगरानी जैसे माध्यमों से प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि स्पष्ट प्रक्रिया और तकनीक के बेहतर इस्तेमाल से जनता का सरकारी व्यवस्था पर भरोसा मजबूत होता है। उनका जोर इस बात पर रहा कि तकनीकी सुविधाओं का उद्देश्य नागरिकों के लिए सरकारी सेवाओं को सरल बनाना होना चाहिए।
काव्यपाठ में सामाजिक सरोकार और समकालीन विषय
कार्यक्रम में हिंदी के कई साहित्यकारों और विद्वानों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। काव्यपाठ में सामाजिक सरोकार, राष्ट्रभावना, सांस्कृतिक विविधता और समकालीन विषयों से जुड़ी रचनाएं शामिल रहीं। उपस्थित लोगों ने कवियों की प्रस्तुतियों की सराहना की।
वक्ताओं ने हिंदी को जनसरोकार और सांस्कृतिक एकता से जोड़ने वाली भाषा बताया। उन्होंने कहा कि हिंदी की समृद्धि में देश की अलग-अलग लोकभाषाओं और बोलियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
चर्चा के दौरान यह भी कहा गया कि हिंदी समय के साथ विभिन्न भाषाओं के शब्दों को आत्मसात करते हुए लगातार विकसित हुई है। इसलिए इसे केवल अतीत की विरासत के रूप में देखने के बजाय भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने की आवश्यकता है।
स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आधुनिक दौर तक हिंदी की भूमिका
विद्वानों ने हिंदी के ऐतिहासिक योगदान पर भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हिंदी ने लोगों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वर्तमान समय में भी हिंदी विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों के बीच संवाद का माध्यम बनी हुई है।
वक्ताओं ने लोकभाषाओं और बोलियों को हिंदी की ताकत बताते हुए इनके संरक्षण और योगदान को रेखांकित किया। वैश्विक स्तर पर हिंदी के बदलते स्वरूप पर भी चर्चा हुई।
कार्यक्रम का समापन हिंदी के प्रचार-प्रसार और संवर्धन के प्रति सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
कई साहित्यकार और अधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम में डॉ. जिंदर सिंह मुंडा, अध्यक्ष, स्नातकोत्तर हिंदी विभाग, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय; डॉ. केदार सिंह, सेवानिवृत्त प्राध्यापक, विनोबा भावे विश्वविद्यालय; प्रख्यात कवयित्री एवं लेखिका डॉ. वंदना टेटे; डॉ. सावित्री बड़ाईक, सहायक प्राध्यापक, एसएस मेमोरियल महाविद्यालय और डॉ. कुमारी उर्वशी सहित कई विद्वान उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का स्वागत संबोधन उप सचिव संजय रजक ने किया। कार्मिक विभाग की ओर से संयुक्त निदेशक आसिफ हसन और इश्तियाक अहमद मौजूद रहे। एटीआई से शालिनी खलखो और अपर निदेशक सीमा सिंह समेत अन्य अधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
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