चाईबासा में 10 लाख के इनामी माओवादी सालुका कायम का आत्मसमर्पण

चाईबासा में 10 लाख के इनामी माओवादी सालुका कायम का आत्मसमर्पण, संगठन को बड़ा झटका

चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम के कोल्हान और पोड़ाहाट क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों से जुड़े 10 लाख रुपये के इनामी जोनल कमांडर सालुका कायम के आत्मसमर्पण को सुरक्षा एजेंसियां बड़ी सफलता के तौर पर देख रही हैं। सोनुवा क्षेत्र के कुदाबुरु गांव निवासी सालुका लंबे समय से सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बना हुआ था। बताया जाता है कि सालुका को कोल्हान और पोड़ाहाट के जंगलों की भौगोलिक स्थिति तथा स्थानीय परिस्थितियों की अच्छी जानकारी थी। इसी वजह से वह संगठन के स्थानीय नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था।

सुरक्षा अभियानों के बढ़ते दबाव के बीच किया सरेंडर

सालुका के दस्ते पर पिछले कुछ समय से सुरक्षा बलों का दबाव लगातार बढ़ रहा था। विभिन्न अभियानों के कारण संगठन के सदस्यों के सामने जंगल में बने रहना मुश्किल होता गया। बताया जा रहा है कि उसके दस्ते में शामिल कई सदस्य अलग हो चुके थे और कुछ ने सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण भी किया। लगातार बढ़ते दबाव और संगठनात्मक कमजोरी के बीच आखिरकार सालुका ने आत्मसमर्पण का रास्ता चुना। उसके सरेंडर को कोल्हान क्षेत्र में माओवादी नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण झटका माना जा रहा है।

जंगलों में संगठन के लिए निभाता था अहम भूमिका

सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, सालुका लंबे समय तक माओवादी संगठन के स्थानीय नेटवर्क से जुड़ा रहा। जंगलों में आवाजाही, स्थानीय स्तर पर संपर्क और संगठन के लिए जरूरी संसाधनों की व्यवस्था जैसी गतिविधियों में उसकी भूमिका बताई जाती रही है। उस पर सुरक्षा बलों की गतिविधियों की निगरानी करने और जंगलों में विस्फोटक एवं अन्य खतरनाक अवरोध तैयार करने से जुड़े आरोप भी रहे हैं। हालांकि, इन सभी मामलों में अंतिम स्थिति संबंधित जांच और आधिकारिक दस्तावेजों से ही स्पष्ट होगी।

लांजी पहाड़ी विस्फोट मामले में भी आया था नाम

सालुका कायम का नाम वर्ष 2021 में हुए लांजी पहाड़ी आईईडी विस्फोट मामले में भी सामने आया था। इस घटना में झारखंड पुलिस के तीन जवानों की मौत हुई थी। मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए द्वारा किए जाने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा सालुका के खिलाफ अन्य आपराधिक और नक्सली गतिविधियों से जुड़े मामले भी दर्ज होने की बात सामने आई है। जांच एजेंसियां उसके आपराधिक नेटवर्क और संगठन से जुड़े संपर्कों की भी पड़ताल कर रही हैं।

पहले भी पुलिस गिरफ्त से निकल चुका था

बताया जाता है कि सालुका इससे पहले पुलिस की गिरफ्त में आ चुका था। हालांकि, बाद में वह जेल से फरार होने में सफल रहा और दोबारा माओवादी संगठन में सक्रिय हो गया। उसके बाद वह क्षेत्र में फिर से संगठन के लिए काम करने लगा। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, लंबे समय तक उसकी तलाश जारी रही और जंगलों में कई अभियानों के दौरान वह सुरक्षा बलों की पकड़ से बचता रहा।

पश्चिमी सिंहभूम में कमजोर हुआ माओवादी नेटवर्क

पश्चिमी सिंहभूम लंबे समय तक झारखंड में माओवादी गतिविधियों का प्रमुख क्षेत्र रहा है। पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों ने कोल्हान और सारंडा के जंगलों में लगातार अभियान चलाए हैं। इन अभियानों के दौरान कई माओवादी मारे गए, गिरफ्तार हुए या आत्मसमर्पण कर चुके हैं। संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ने और नए कैंप स्थापित होने से माओवादी गतिविधियों पर दबाव बढ़ा है। सालुका कायम का आत्मसमर्पण भी इसी बदलती स्थिति के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, पश्चिमी सिंहभूम को पूरी तरह नक्सलमुक्त घोषित किए जाने को लेकर अंतिम आधिकारिक निर्णय संबंधित सुरक्षा और प्रशासनिक एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर ही होगा।

यह भी पढ़ें: रांची में छात्रों और झारखंड सरकार के मंत्रियों की बैठक खत्म, मांगों पर सकारात्मक बातचीत का दावा