रांची में ग्रामीण भारत महोत्सव-क्लासिक एक्सपो 2026 का उद्घाटन

रांची में ग्रामीण भारत महोत्सव-क्लासिक एक्सपो 2026 का उद्घाटन, ग्रामीण हुनर को बाजार से जोड़ने पर जोर

रांची: झारखंड की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को रांची में नाबार्ड (NABARD) की ओर से आयोजित ‘ग्रामीण भारत महोत्सव-क्लासिक एक्सपो 2026’ के छठे संस्करण का औपचारिक उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने एक्सपो में देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे बुनकरों, कारीगरों और महिला स्वयं सहायता समूहों के स्टॉलों का निरीक्षण किया।

मंत्री ने विभिन्न स्टॉलों पर प्रदर्शित उत्पादों की जानकारी ली और ग्रामीण कारीगरों के हुनर की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। एक्सपो में देश के विभिन्न राज्यों के पारंपरिक हैंडलूम, आर्ट एंड क्राफ्ट्स के साथ झारखंड की सिल्क साड़ियों और हस्तशिल्प उत्पादों को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है।

ग्रामीण उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना प्राथमिकता

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि देश और राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किए बिना समावेशी विकास की कल्पना पूरी नहीं हो सकती। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बुनकरों, कारीगरों और छोटे उत्पादकों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए उन्हें बेहतर बाजार उपलब्ध कराना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण भारत महोत्सव जैसे आयोजन ग्रामीण और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे मंचों के जरिए उत्पादकों को बड़े बाजार से जुड़ने का अवसर मिलता है और उनके उत्पादों की पहुंच भी बढ़ती है।

मंत्री ने यह भी कहा कि एक्सपो में बड़ी संख्या में GI Tag वाले गुणवत्तापूर्ण उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। ऐसे उत्पाद खरीदारों का भरोसा बढ़ाने के साथ उत्पादकों को शहरी बाजारों से सीधे जोड़ने में मदद कर सकते हैं।

कारीगरों को मिले उनके उत्पाद का उचित मूल्य

दीपिका पांडेय सिंह ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि के साथ-साथ आय के दूसरे स्रोतों की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आय के साधन आर्थिक सुरक्षा बढ़ाने में मदद करते हैं।

इससे परिवारों के जीवन स्तर के साथ बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी जरूरतों को पूरा करने में भी सहूलियत होती है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में तैयार होने वाले कई उत्पाद बड़े शहरों में पहुंचने के बाद काफी अधिक कीमत पर बिकते हैं, लेकिन उत्पाद की वास्तविक कीमत का पर्याप्त लाभ कई बार कारीगर तक नहीं पहुंच पाता।

मंत्री ने कहा कि एक्सपो और Buyers-Sellers Meet जैसे आयोजनों का उद्देश्य उत्पादकों और बाजार के बीच दूरी कम करना है। इससे वास्तविक बुनकरों और कारीगरों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाने की दिशा में मदद मिल सकती है।

JSLPS के जरिए महिला समूहों को बढ़ावा

ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए झारखंड में स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देने की बात भी मंत्री ने कही। उन्होंने बताया कि ग्रामीण विकास विभाग और JSLPS के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों को स्वरोजगार, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता से जोड़ने का काम किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि जिस तरह बड़े उद्योगों के लिए वित्तीय सहायता जरूरी होती है, उसी तरह ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्यम चलाने वाले लोगों को भी आसान क्रेडिट लिंकेज और बैंकिंग सुविधाओं की जरूरत होती है। इससे ग्रामीण स्तर पर छोटे कारोबार और स्वरोजगार को मजबूती मिल सकती है।

झारखंड के स्थानीय हुनर को राष्ट्रीय मंच देने की कोशिश

दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य झारखंड के स्थानीय हुनर और ग्रामीण महिलाओं की मेहनत को बेहतर मंच उपलब्ध कराना है। इसके लिए ग्रामीण उत्पादों को बाजार से जोड़ने, कारीगरों को उचित मूल्य दिलाने और स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

रांची में आयोजित यह एक्सपो देश के अलग-अलग राज्यों की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और ग्रामीण उत्पादों को एक मंच पर लाने का अवसर प्रदान कर रहा है। खास तौर पर झारखंड की सिल्क साड़ियों और हस्तशिल्प उत्पादों की मौजूदगी राज्य के स्थानीय हुनर को व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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