बोकारो में प्रधानमंत्री आवास योजना की जांच में सामने आईं कई खामियां, पढ़िए CAG रिपोर्ट की पूरी बात
- By rakesh --
- 04 Sep 2026 --
- comments are disable
बोकारो। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के क्रियान्वयन को लेकर नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में बोकारो जिले में कई स्तर की अनियमितताएं सामने आने की बात कही गई है। रिपोर्ट में आवास निर्माण की स्थिति के अनुरूप किस्त जारी नहीं होने, जियो-टैग तस्वीरों की कमी और योजना के उद्देश्य से अलग आवासों के इस्तेमाल जैसे मामले दर्ज किए गए हैं।
CAG की जांच में योजना के तहत स्वीकृत और निर्मित आवासों से जुड़े रिकॉर्ड तथा मौके की स्थिति का परीक्षण किया गया। इसी दौरान कुछ मामलों में पोर्टल पर दर्ज जानकारी और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर पाया गया।
पत्नी के नाम पहले से आवास, फिर भी मिला PMAY-G का लाभ
जरीडीह प्रखंड की गायछंदा पंचायत में एक लाभार्थी को प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत आवास स्वीकृत किया गया था। CAG रिपोर्ट के अनुसार, जांच में सामने आया कि लाभार्थी की पत्नी के नाम पर पहले ही इंदिरा आवास योजना के तहत मार्च 2013 में आवास स्वीकृत हो चुका था।
इसके बावजूद संबंधित लाभार्थी को जून 2018 से सितंबर 2020 के बीच 1.30 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने का उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है।
यह मामला योजना के तहत लाभार्थियों के चयन और पूर्व में मिले आवासीय लाभ की जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़ा करता है।
स्वीकृति के नौ दिन बाद ही आवास पूरा होने का दावा
जरीडीह प्रखंड की बांधडीह साउथ पंचायत से जुड़े एक अन्य मामले में आवास सॉफ्ट पोर्टल पर आवास के 17 फरवरी 2021 को पूरा होने की जानकारी दर्ज थी। जबकि संबंधित आवास की स्वीकृति 8 फरवरी 2021 को मिली थी।
इस तरह पोर्टल के रिकॉर्ड के अनुसार स्वीकृति मिलने के महज नौ दिन बाद आवास पूरा होने का दावा किया गया। संबंधित लाभार्थी को पहली दो किस्तों के रूप में 1.25 लाख रुपये दिए गए थे।
ऑडिट के दौरान जब मौके पर आवास की स्थिति की जांच की गई तो बांधडीह साउथ गांव में संबंधित आवास नहीं मिला। इसके बाद आवास सॉफ्ट पोर्टल पर अपलोड जियो-स्टैटिस्टिकल डेटा की जांच की गई। इसमें लोकेशन उस स्थान पर मिली, जहां बांधडीह पंचायत कार्यालय संचालित हो रहा था।
दो PMAY-G आवासों में चल रहा था निजी स्कूल
जरीडीह प्रखंड की चिलगड्डा पंचायत में भी योजना से जुड़े दो आवासों के इस्तेमाल को लेकर ऑडिट में स्थिति दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, दो लाभार्थियों ने एक-दूसरे से सटे प्रधानमंत्री आवास का निर्माण कराया था।
जांच के दौरान दोनों आवासों में लाभार्थियों के रहने की बात सामने आई। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि इन आवासों का इस्तेमाल निजी स्कूल संचालित करने के लिए किया जा रहा था।
योजना के तहत बनाए गए आवासों के इस्तेमाल को लेकर सामने आया यह मामला भी CAG की जांच का हिस्सा रहा।
17 आवासों की अनिवार्य जियो-टैग तस्वीर नहीं मिली
जिले में राजमिस्त्रियों के प्रशिक्षण के दौरान 1,101 आवासों के निर्माण पूरा होने की जानकारी दी गई थी। इनमें से 40 आवासों की आवास सॉफ्ट पोर्टल के माध्यम से क्रॉस-चेकिंग की गई।
ऑडिट में पाया गया कि इनमें से 17 आवासों के निर्माण पूरा होने के चरण की अनिवार्य जियो-टैग तस्वीर पोर्टल पर अपलोड नहीं की गई थी।
जियो-टैग तस्वीरों के माध्यम से आवास निर्माण की स्थिति और स्थान की पुष्टि की जाती है। ऐसे में तस्वीरों का उपलब्ध नहीं होना ऑडिट जांच में एक महत्वपूर्ण बिंदु रहा।
44,409 आवासों में नहीं मिला जल कनेक्शन
CAG रिपोर्ट में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत बने घरों में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2016 से 2024 के बीच बोकारो जिले में 47,984 आवास बनाए गए।
इनमें से 44,409 आवासों में जल कनेक्शन नहीं मिला। इसके अलावा 3,481 आवासों में बिजली कनेक्शन और 6,023 आवासों में एलपीजी कनेक्शन नहीं पाया गया।
रिपोर्ट में सामने आए ये आंकड़े बताते हैं कि आवास निर्माण के साथ लाभार्थियों को उपलब्ध कराई जाने वाली बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी जांच के दायरे में रही। PMAY-G के क्रियान्वयन से जुड़े इन मामलों में CAG ने रिकॉर्ड और मौके की स्थिति के आधार पर विभिन्न कमियों को दर्ज किया है।
यह भी पढ़ें: Bokaro Crime Review: जमानत पर बाहर अपराधियों की पुलिस करेगी निगरानी, डीएसपी ने दिए सख्त निर्देश