भारत की विदेश नीति पर सुधाकर सिंह के 5 सवाल, PM मोदी को पत्र लिखकर की पारदर्शिता की मांग
- By rakesh --
- 22 Oct 2026 --
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बक्सर/पटना: बक्सर से सांसद सुधाकर सिंह ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा के दौरान प्रमुख भारतीय उद्योगपतियों से हुई मुलाकातों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने भारत की विदेश नीति की स्वायत्तता, राजनयिक प्रोटोकॉल और रणनीतिक आर्थिक मामलों में सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। सांसद ने प्रधानमंत्री से पूरे घटनाक्रम पर स्पष्टीकरण देने और भविष्य के लिए पारदर्शी दिशा-निर्देश तय करने की मांग की है।
अदाणी, टाटा और अंबानी से मुलाकात पर उठाए सवाल
सुधाकर सिंह के पत्र के अनुसार, मार्को रुबियो ने मुंबई में अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी और टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन से मुलाकात की। इसके बाद अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के साथ जामनगर पहुंचकर रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रमुख मुकेश अंबानी से भी बातचीत की।
सांसद ने इन मुलाकातों में ऊर्जा, पेट्रोलियम, निवेश और रणनीतिक आर्थिक सहयोग जैसे विषयों पर कथित चर्चा को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में भारत सरकार की भूमिका और आधिकारिक समन्वय की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। हालांकि, इन बैठकों में किन विषयों पर वास्तव में चर्चा हुई, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध विवरण से नहीं होती।
राजनयिक प्रोटोकॉल और विदेश मंत्रालय की भूमिका पर सवाल
पत्र में सुधाकर सिंह ने दो प्रमुख मुद्दों को उठाया है। पहला, उन्होंने सवाल किया कि अमेरिकी विदेश मंत्री की यात्रा के दौरान राजनयिक प्रोटोकॉल का पालन किस तरह किया गया और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को मुंबई जाकर मुलाकात क्यों करनी पड़ी।
दूसरा, उन्होंने पूछा कि भारतीय उद्योगपतियों के साथ अमेरिकी विदेश मंत्री की रणनीतिक बातचीत के दौरान भारत सरकार या विदेश मंत्रालय का कोई आधिकारिक प्रतिनिधि मौजूद था या नहीं। सांसद ने कहा कि ऊर्जा और आर्थिक सहयोग जैसे राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर सरकार की भूमिका स्पष्ट होना जरूरी है।
उन्होंने अपने पत्र में पूर्व प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए भारत की पारंपरिक विदेश नीति और रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
प्रधानमंत्री से पूछे पांच अहम सवाल
सुधाकर सिंह ने पत्र के माध्यम से प्रधानमंत्री के सामने पांच प्रमुख सवाल रखे हैं। इनमें अमेरिकी विदेश मंत्री को नई दिल्ली बुलाने के बजाय मुंबई में मुलाकात होने के पीछे के कारणों पर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
उन्होंने यह भी पूछा है कि क्या उद्योगपतियों के साथ हुई बैठकें भारत सरकार की जानकारी और समन्वय से आयोजित की गई थीं। इसके अलावा रूस और वेनेजुएला से तेल आयात, अमेरिकी प्रतिबंधों तथा संभावित व्यापारिक समझौतों पर बातचीत होने की स्थिति में उसका आधिकारिक विवरण उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
सांसद ने प्रमुख औद्योगिक समूहों के साथ विदेशी सरकारों के सीधे संपर्क को लेकर केंद्र की नीति स्पष्ट करने की बात कही है। साथ ही उन्होंने भविष्य में ऐसी रणनीतिक बैठकों के लिए पारदर्शी दिशा-निर्देश तय करने और पूरे घटनाक्रम का विवरण संसद के पटल पर रखने की मांग भी उठाई है।
‘विदेश नीति कॉर्पोरेट रणनीति का विस्तार नहीं हो सकती’
अपने पत्र के अंत में सुधाकर सिंह ने कहा कि भारत की विदेश नीति का आधार देश के व्यापक राष्ट्रीय हित होने चाहिए। उनके अनुसार, 140 करोड़ भारतीयों के हितों का प्रतिनिधित्व करने वाली विदेश नीति को किसी निजी कॉर्पोरेट रणनीति का विस्तार नहीं बनाया जाना चाहिए।
सांसद ने इस बात पर जोर दिया कि विदेशी राजनयिकों और भारतीय उद्योगपतियों के बीच होने वाली रणनीतिक बातचीत में पारदर्शिता और सरकारी जवाबदेही महत्वपूर्ण हैं। अब इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है या नहीं, इस पर नजर रहेगी।
नोट: उद्योगपतियों से मुलाकातों, चर्चाओं और राजनयिक प्रोटोकॉल को लेकर उठाए गए सवाल सांसद सुधाकर सिंह के पत्र में व्यक्त चिंताओं पर आधारित हैं। इन्हें सरकार की ओर से प्रमाणित निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।
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