बाघ प्रताप बना राष्ट्रीय पुलिस तीरंदाजी प्रतियोगिता का शुभंकर, झारखंड को मिली नई पहचान
- By rakesh --
- 23 Oct 2026 --
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रांची: झारखंड के जंगलों में रहने वाले बाघ अब खेल के मैदान के जरिए भी अपनी पहचान बना रहे हैं। पलामू टाइगर रिजर्व के बेतला क्षेत्र में पहचाने गए बाघ ‘प्रताप’ को रांची में आयोजित 15वीं अखिल भारतीय पुलिस तीरंदाजी प्रतियोगिता का शुभंकर चुना गया है। इस पहल से राष्ट्रीय खेल आयोजन के साथ राज्य की समृद्ध वन्यजीव विरासत और बाघ संरक्षण का संदेश भी जुड़ गया है।
वन विभाग की निगरानी में कैमरा ट्रैप के माध्यम से दर्ज इस बाघ की पहचान T-07 के रूप में की गई है। प्रतियोगिता के शुभंकर के रूप में प्रताप का चयन झारखंड के जंगलों और वन्यजीवों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
रांची में 26 अक्टूबर तक चलेगी प्रतियोगिता
राजधानी रांची के खेलगांव स्थित बिरसा मुंडा एथलेटिक्स स्टेडियम में 22 अक्टूबर से शुरू हुई यह प्रतियोगिता 26 अक्टूबर तक आयोजित की जा रही है। झारखंड पुलिस इस राष्ट्रीय आयोजन की मेजबानी कर रही है। इसमें देश के विभिन्न राज्यों और पुलिस इकाइयों के खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं।
प्रतियोगिता का उद्घाटन झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने किया। आयोजन में पुलिसकर्मी तीरंदाजी की विभिन्न स्पर्धाओं में अपनी प्रतिभा और निशानेबाजी का प्रदर्शन कर रहे हैं।
क्यों चुना गया बाघ प्रताप को शुभंकर?
बाघ को साहस, शक्ति और दृढ़ता का प्रतीक माना जाता है। दूसरी ओर, तीरंदाजी में एकाग्रता, धैर्य और लक्ष्य पर सटीक निशाना साधना बेहद जरूरी होता है। इन विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए बाघ प्रताप को प्रतियोगिता के शुभंकर के रूप में प्रस्तुत करना खेल की भावना से जुड़ा एक खास संदेश देता है।
इस चयन के जरिए लोगों को वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक करने का अवसर भी मिल रहा है। साथ ही, देश के अलग-अलग हिस्सों से आए खिलाड़ियों और दर्शकों के बीच पलामू टाइगर रिजर्व तथा बेतला के बारे में जानकारी पहुंचने की संभावना बढ़ी है।
कैमरा ट्रैप में T-07 के नाम से दर्ज है प्रताप
बाघ प्रताप की पहचान पलामू टाइगर रिजर्व में लगाए गए कैमरा ट्रैप से हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह एक कम उम्र का नर बाघ है, जिसे वन्यजीव निगरानी के दौरान T-07 कोड दिया गया है। यह रिजर्व के अलग-अलग क्षेत्रों में विचरण करता है और इसकी गतिविधियों पर नजर रखी जाती है।
प्रताप को राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता से जोड़ने से झारखंड के वन्यजीवों की चर्चा खेल जगत में भी हो रही है। इससे बाघों के प्राकृतिक आवास और उनके संरक्षण की जरूरत को सामने लाने में मदद मिल सकती है।
झारखंड का एकमात्र टाइगर रिजर्व है पलामू
लातेहार जिले के पश्चिमी हिस्से में स्थित पलामू टाइगर रिजर्व झारखंड का एकमात्र टाइगर रिजर्व है। दिए गए विवरण के मुताबिक, इसका कुल क्षेत्रफल 1,129.93 वर्ग किलोमीटर है। बेतला नेशनल पार्क भी इसी संरक्षित क्षेत्र का हिस्सा है और पर्यटकों के बीच खास पहचान रखता है।
यह क्षेत्र अपने जंगलों, प्राकृतिक वातावरण और वन्यजीव विविधता के लिए जाना जाता है। ऐसे में यहां के बाघ को राष्ट्रीय स्तर के आयोजन का चेहरा बनाए जाने से राज्य की प्राकृतिक संपदा को प्रचार मिलने का अवसर मिला है।
तीरंदाजी, पुलिस सेवा और प्रकृति संरक्षण का संगम
15वीं अखिल भारतीय पुलिस तीरंदाजी प्रतियोगिता में रिकर्व, कंपाउंड और इंडियन राउंड की व्यक्तिगत तथा टीम स्पर्धाएं आयोजित की जा रही हैं। प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ी विभिन्न श्रेणियों में पदकों के लिए मुकाबला कर रहे हैं।
बाघ प्रताप को शुभंकर बनाने की पहल खेल और पर्यावरण के बीच संबंध को भी रेखांकित करती है। रांची में आयोजित यह प्रतियोगिता पुलिस खिलाड़ियों के कौशल को प्रदर्शित करने के साथ झारखंड के जंगलों और वन्यजीवों की ओर भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है। इससे राज्य की पहचान खेल प्रतिभाओं के साथ-साथ उसकी प्राकृतिक विरासत के रूप में भी मजबूत हो सकती है।
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