Jharkhand Treasury Scam: 150 करोड़ से अधिक के घोटाले पर गरमाई सियासत, भाजपा ने उठाए सवाल
- By rakesh --
- 13 Sep 2026 --
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रांची: झारखंड में 150 करोड़ रुपये से अधिक के बहुचर्चित ट्रेजरी स्कैम यानी कोषागार घोटाले को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य सरकार पर मामले की जांच को सीमित रखने और बड़े स्तर के जिम्मेदार लोगों तक कार्रवाई नहीं पहुंचने का आरोप लगाया है।
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने दावा किया कि हजारीबाग, बोकारो, रांची, देवघर, पलामू, गोड्डा, जमशेदपुर, रामगढ़ और चाईबासा समेत कई जिलों के कोषागारों से वित्तीय अनियमितता की जानकारी सामने आई है। उनका आरोप है कि इतने बड़े मामले में जांच केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है।
150 करोड़ से अधिक की गड़बड़ी का दावा
अजय साह के अनुसार, शुरुआती जांच में ही वित्तीय अनियमितता का आंकड़ा 150 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकारी खजाने से इतनी बड़ी राशि की कथित अनियमित निकासी केवल निचले स्तर के कर्मचारियों की जानकारी या मिलीभगत से कैसे संभव हो सकती है।
भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि इस तरह की बड़ी वित्तीय अनियमितता में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका और निगरानी व्यवस्था की भी जांच जरूरी है। उन्होंने मांग की कि जांच का दायरा बढ़ाकर उन अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जाए, जिनके कार्यकाल में संबंधित कोषागारों से कथित निकासी हुई।
SIT-CID जांच का दायरा बढ़ाने की मांग
भाजपा ने ट्रेजरी स्कैम की जांच में एसआईटी और सीआईडी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए हैं। अजय साह ने कहा कि जांच एजेंसियों को केवल छोटे स्तर के कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
उनका कहना है कि मामले में जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी वित्तीय प्रक्रिया, निगरानी और स्वीकृति से जुड़ी रही है, उनकी भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। भाजपा ने पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।
हालांकि, भाजपा की ओर से लगाए गए इन आरोपों पर संबंधित जांच एजेंसियों या सरकार का पक्ष इस स्रोत में उपलब्ध नहीं है। इसलिए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के निष्कर्ष के बाद ही हो सकेगी।
परीक्षा घोटाले का उदाहरण देकर सरकार पर निशाना
अजय साह ने अपने आरोपों के समर्थन में पूर्व में सामने आए परीक्षा घोटाले का उदाहरण भी दिया। उन्होंने दावा किया कि उस मामले में भी शुरुआत में जांच का दायरा सीमित रखने और प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश हुई थी।
भाजपा प्रवक्ता के मुताबिक, छात्रों और युवाओं के आंदोलन के बाद जांच का दायरा बढ़ा और प्रभावशाली लोगों तक कार्रवाई पहुंची। उन्होंने इसी आधार पर आरोप लगाया कि ट्रेजरी स्कैम में भी छोटे स्तर के आरोपियों को जिम्मेदार ठहराकर बड़े अधिकारियों और कथित मुख्य साजिशकर्ताओं को बचाने की कोशिश की जा रही है।
SP और वित्त मंत्री पर भी भाजपा ने उठाए सवाल
अजय साह ने कोषागार से होने वाली निकासी की प्रक्रिया में DDO यानी Drawing and Disbursing Officer की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने उन जिलों के तत्कालीन और वर्तमान पुलिस अधीक्षकों को लेकर सवाल उठाया, जहां कथित तौर पर बड़ी राशि की निकासी हुई।
उन्होंने पूछा कि यदि इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितता हुई तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही अब तक तय क्यों नहीं की गई।
भाजपा प्रवक्ता ने राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर पर भी निशाना साधा। उनका आरोप है कि उनके कार्यकाल में कोषागारों से इतनी बड़ी गड़बड़ी का मामला सामने आया, लेकिन इस पर पर्याप्त जवाबदेही तय नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि वित्त मंत्री इसके बजाय झारखंड की वित्तीय स्थिति के लिए केंद्र सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
भाजपा ने मांग की है कि ट्रेजरी स्कैम की जांच को व्यापक बनाया जाए और पूरे प्रशासनिक एवं वित्तीय तंत्र में जिनकी भी भूमिका सामने आए, उनकी जवाबदेही तय की जाए। फिलहाल मामले में लगाए गए राजनीतिक आरोपों पर आगे की जांच और संबंधित पक्षों के आधिकारिक जवाब का इंतजार है।
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