Jharkhand DGP: तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट में सवाल, नियमों को प्रकाश सिंह फैसले के खिलाफ बताया
- By rakesh --
- 09 Oct 2026 --
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रांची/नई दिल्ली: झारखंड के पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति से जुड़े नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर कानूनी सवाल उठाए हैं। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने प्रथम दृष्टया कहा कि झारखंड में डीजीपी नियुक्ति के लिए बनाए गए नियम सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह मामले में दिए गए फैसले के अनुरूप नहीं दिखते। अदालत ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और झारखंड की मौजूदा डीजीपी तदाशा मिश्रा से भी जवाब मांगा है।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की। झारखंड सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार डीजीपी नियुक्ति से जुड़े नियमों पर दोबारा विचार करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने नियमों पर उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि झारखंड के 2025 के डीजीपी नियुक्ति नियमों में ऐसा प्रावधान है, जिसके तहत छह महीने से कम सेवा अवधि बाकी रहने वाले अधिकारी को भी डीजीपी नियुक्ति के लिए विचार किया जा सकता है। पीठ ने प्रथम दृष्टया इसे प्रकाश सिंह मामले में निर्धारित कानून से टकराता हुआ बताया।
अदालत ने कहा कि यदि संबंधित नियम को रद्द किया जाता है तो इसका सीधा असर तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर पड़ सकता है। इसी वजह से उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जा रहा है। अदालत ने झारखंड सरकार को उन्हें नोटिस देने को कहा है।
तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर क्यों उठे सवाल?
तदाशा मिश्रा को 30 दिसंबर 2025 को झारखंड का डीजीपी नियुक्त किया गया था, जबकि उनकी सेवानिवृत्ति अगले दिन यानी 31 दिसंबर को होनी थी। इससे पहले राज्य के डीजीपी नियुक्ति नियमों में बदलाव किया गया था। केंद्र सरकार ने इसी प्रक्रिया और 2025 के नियमों की वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
केंद्र का तर्क है कि यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह फैसले में निर्धारित डीजीपी चयन प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। प्रकाश सिंह मामले में डीजीपी पद के लिए विचार किए जाने वाले अधिकारियों के लिए न्यूनतम शेष सेवा अवधि से संबंधित दिशा-निर्देश भी दिए गए थे।
कपिल सिब्बल ने कहा- नियमों पर फिर विचार करेगा राज्य
झारखंड सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार नियमों पर फिर से विचार करेगी। हालांकि, उन्होंने तदाशा मिश्रा की नियुक्ति का बचाव करने की इच्छा भी जताई।
पीठ ने राज्य को संबंधित नियम पर पुनर्विचार करने का विकल्प दिया है। इसके अलावा राज्य चाहे तो अदालत के समक्ष जवाबी हलफनामा भी दाखिल कर सकता है। मामले को आगे की सुनवाई के लिए एक सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने की बात कही गई है।
केंद्र ने 2025 के नियमों को दी है चुनौती
केंद्र सरकार ने ‘Selection and Appointment of Director General and Inspector General of Police, Jharkhand (Head of Police Force) Regulations, 2025’ को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। यह नियम झारखंड सरकार ने 8 जनवरी 2025 को अधिसूचित किए थे। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र पहले भी राज्य सरकार को इन नियमों के संबंध में आपत्ति बता चुका है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में न्यायमित्र नियुक्त वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन से झारखंड के नियमों की वैधता की जांच में अदालत की सहायता करने को कहा है। उन्हें अन्य राज्यों में डीजीपी नियुक्ति से जुड़े कानूनों और नियमों का भी अध्ययन करने को कहा गया है, ताकि संबंधित व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की जा सके।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने तदाशा मिश्रा की नियुक्ति रद्द करने का अंतिम आदेश नहीं दिया है। मामले में राज्य सरकार और तदाशा मिश्रा का जवाब आने के बाद अदालत आगे की सुनवाई करेगी।
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